मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर थाना पुलिस ने दो नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्यों में बेचने और बाल श्रम कराने की साजिश को नाकाम कर दिया है। पुलिस ने मध्यप्रदेश के ग्राम चरखर के पास से दोनों नाबालिग बच्चों को सुरक्षित छुड़ाकर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामले का मुख्य आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया है।
पुलिस के अनुसार, जनकपुर थाने में शिकायत मिली थी कि शिकायतकर्ता का नाबालिग बेटा और पड़ोसी दिवंगत सुभाष यादव का नाबालिग बेटा घर से चले गए हैं। परिजनों ने दलबीर बैगा नाम के व्यक्ति पर दोनों बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। थाना प्रभारी उपनिरीक्षक विजय सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने मोबाइल लोकेशन, तकनीकी विश्लेषण और संभावित ठिकानों पर दबिश देकर बच्चों की खोजबीन शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी दलबीर बैगा अपने साथी मनराज बैगा के साथ मिलकर दोनों बच्चों को मेरठ से आगे मुजफ्फरनगर ले जा रहा है। पुलिस ने लगातार निगरानी के आधार पर आरोपियों का पीछा किया। पुलिस टीम ने मध्यप्रदेश के ग्राम चरखर के पास घेराबंदी कर मनराज बैगा के पास से दोनों नाबालिग बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया। बच्चों ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि आरोपी उन्हें मुजफ्फरनगर मंडी में मजदूरी कराने के नाम पर पैसों में बेचने की योजना बना रहे थे। बच्चों के बयान के बाद पुलिस ने दर्ज मामले में मानव तस्करी और सामूहिक अपराध से संबंधित धाराएं भी जोड़ दी हैं।
पुलिस ने इस मामले में 42 वर्षीय आरोपी मनराज बैगा, निवासी ग्राम कुन्दौर, जिला सीधी (मध्यप्रदेश) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। वहीं, घटना का मुख्य आरोपी दलबीर बैगा अभी फरार चल रहा है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है।