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Kanker: छह साल से लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं, धडल्ले से चल रहा अस्पताल, मदर मेरी में प्रसव के बाद महिला की मौत

Mon, 09 Jun 2025 03:38 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर

सार

कांकेर जिला मुख्यालय के विवादित मदर मेरी अस्पताल में एक बार फिर प्रसव के बाद महिला की मौत हो गई। घटना के बाद जब जानकारी निकाली गई तो चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है।
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प्रसव के बाद महिला की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांकेर जिला मुख्यालय के विवादित मदर मेरी अस्पताल में एक बार फिर प्रसव के बाद महिला की मौत हो गई। घटना के बाद जब जानकारी निकाली गई तो चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। दरअसल नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल संचालन के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के कारण  2019 के बाद अस्पताल के लाइसेंस का रिनीवल ही नहीं किया गया है।  और उस अस्पताल में आपरेशन हो रहे है। उससे भी ज्यादा ध्यान वाली बात ये है कि कुछ वर्षों पूर्व पहले पैसे नहीं देने के कारण परिजनों को लाश नहीं सौंपने  व लापरवाही पूर्वक ईलाज करने से बच्चे की मौत के मामले में अस्पताल को दो बार सिल किया जा चुका है लेकिन विभाग की मेहरबानी से अवैध अस्पताल संचालित हो रहा था।

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घटना के संबंध में मृतक महिला के पति चंद्रकांत टांडिया  ने बताया कि अपनी पत्नी के प्रसव पीड़ा के बाद अलबेलापारा के अस्पताल में 31 मई को भर्ती कराया गया। जहां से प्रारंभिक इलाज के बाद जच्चा बच्चा की जान को खतरा बताकर बाहर रिफर किया गया समय अभाव के चलते आनन फानन में मदर मेरी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर धमतरी से पहुंची एक महिला चिकित्सक ने आपरेशन से प्रसव कराया। बच्चा तो स्वस्थ है लेकिन महिला की तबियत लगातार बिगड़ती गई जिसको देखते हुए परिजन बाहर ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से निवेदन करने लगे लेकिन यही ठीक हो जाएगी कहते हुए रिफर नहीं किया गया। इस बीच 6 जून को रात्रि 3.30 बजे महिला की मौत हो गई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और जांच की मांग की है।

वहीं पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल खड़ा हो रहा है। मदर मेरी अस्पताल का 2019 से लाइसेंस का नवीनीकरण  नहीं हुआ है फिर भी अस्पताल संचालित हो रहा था। वैसे तो मदर मेरी अस्पताल लगातार विवादों में रहा है। कुछ वर्षों पूर्व माहूरबंद पारा के एक युवक के निधन के बाद पैसा जमा नहीं करने के कारण शव को नहीं दिया जा रहा था जिसके बाद अस्पताल को सिल किया गया था। लेकिन किसी तरह से दो सालों में ही पुनः अस्पताल संचालित होने लगा। फिर विश्रामपुरी के एक नवजात बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने के कारण उसकी मौत होने की शिकायत के बाद अस्पताल में फिर ताला लगाया गया और लंबे समय से अस्पताल बंद हो गया था। लेकिन एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से अस्पताल शुरू हुआ और दो दिन पहले बिना मान्यता वाली अस्पताल में महिला की मौत हो गई। ध्यान देने वाली बात तो यह कि 2019 के बाद अपस्ताल संचालित करने के लिए नर्सिंग होम एक्ट के तहत जो दस्तावेज व पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं होने के कारण लाइसेंस का रिनीवल ही नहीं हो सका। फिर अस्पताल कैसे संचालित हो रहा था यह समझ से परे है।
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पूरे मामले को लेकर मुख्य स्वास्थ एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ महेश साडिया का कहना है  कि मदर मेरी अस्पताल के लाइसेंस का रिनीवल नहीं हुआ है। लेकिन अस्पताल कैसे संचालित हो रही है इसकी जांच करवाई जाएगी। 

कल स्वास्थ्य मंत्री का कांकेर प्रवास 
इस बीच प्रदेश शासन के स्वास्थ मंत्री डॉ श्याम बिहारी जायसवाल कल कांकेर जिले के प्रवास पर रहेंगे। मंत्री जी जिले में स्वास्थ सुविधाओं की समीक्षा करेंगे। स्वास्थ मंत्री के आगमन को देखते हुए विभाग साफ सफाई व अन्य सुविधाओं को बेहतर करने में जुटी है लेकिन जिला मुख्यालय में अवैध रूप से संचालित मदर मेरी अस्पताल की ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।

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