स्वच्छ भारत अभियान के तहत कबीरधाम जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की जमीनी व्यवस्था को राज्य स्तर पर निरीक्षण किया गया। राज्य सलाहकार अभिलाषा आनंद ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अंतर्गत चयनित ग्राम पंचायत धरमपुरा, रुसे और सारंगपुरकला पहुंचकर एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) और सेग्रीगेशन शेड की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को स्वच्छता के साथ ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
राज्य सलाहकार ने सेग्रीगेशन शेड में सूखा, गीला, लाल और काला कचरा अलग-अलग रखने की व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि घर-घर से निकलने वाले कचरे का पृथक्करण उसके स्रोत पर ही सुनिश्चित कराया जाए, ताकि उसके सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
उन्होंने कहा कि कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन केवल गांवों को स्वच्छ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पुनर्चक्रण के जरिए स्व-सहायता समूहों और कचरा संग्रहण में लगी महिलाओं के लिए रोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान अभिलाषा आनंद ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं, स्वच्छाग्राहियों, मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक परिवार को अपने घर से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा और अन्य श्रेणियों में अलग-अलग करना चाहिए। लोगों की यह छोटी-सी आदत गांव की स्वच्छता के साथ कई महिलाओं की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है।
उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता अभियान को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील करते हुए कहा कि सामुदायिक सहयोग से ही स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण संभव है। निरीक्षण के दौरान स्वच्छ भारत अभियान की जिला सलाहकार स्वाति शुक्ला, संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।