छत्तीसगढ़ के चिल्फी में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर आबकारी चेकपोस्ट के पास बाइक से गांजा ले जाते पकड़े गए मध्यप्रदेश के दो आरोपियों को विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। विशेष न्यायाधीश योगिता विनय वासनिक ने 23 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया।
बाइक की सीट में छिपाकर ले जा रहे थे गांजा
मामला 3 अगस्त 2024 का है। चिल्फी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि काले रंग की होंडा बाइक से दो व्यक्ति गांजा लेकर कवर्धा-चिल्फी मार्ग से जबलपुर की ओर जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने एनएच-30 पर आबकारी चेकपोस्ट के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की।
इसी दौरान मुखबिर के बताए हुलिए और नंबर वाली बाइक पर दो व्यक्ति आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोककर पूछताछ की। बाइक चालक की पहचान मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर निवासी जैनेन्द्र सिंह चौधरी (38) और पीछे बैठे युवक की पहचान जबलपुर जिले के बेलखेड़ा थाना क्षेत्र के पावला निवासी राज लोधी (19) के रूप में हुई।
तलाशी के दौरान बाइक की सीट में खाकी रंग की टेप से लिपटा गांजा मिला। तौल करने पर इसकी मात्रा 11.180 किलोग्राम निकली। पुलिस ने गांजा, बाइक और दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(ii)(बी) के तहत मामला दर्ज किया था।
रासायनिक जांच में गांजे की पुष्टि
जब्त गांजे के नमूने को रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया था, जिसमें उसके गांजा होने की पुष्टि हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजों के माध्यम से न्यायालय के सामने साक्ष्य प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। सजा सुनाते समय न्यायालय ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और इससे होने वाले अपराधों के सामाजिक दुष्प्रभावों का भी उल्लेख किया।
जब्त बाइक और मोबाइल राज्य के पक्ष में राजसात
न्यायालय के आदेश के अनुसार, दोनों आरोपी 3 अगस्त से 19 नवंबर 2024 तक न्यायिक अभिरक्षा में रहे थे। इस अवधि को उनकी सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने जब्त गांजे के नमूनों के निस्तारण के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने और शेष गांजे को औषधि व्ययन समिति के पास भेजने का आदेश दिया। जब्त बाइक और मोबाइल फोन पर किसी ने दावा नहीं किया था, इसलिए उन्हें राज्य के पक्ष में राजसात करने का भी निर्देश दिया गया।
जिला कोर्ट ने फैसला सुनाया है