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Kabirdham: नई पुनर्वास नीति का असर, 10 लाख के इनामी नक्सली दंपती ने किया सरेंडर

Sat, 18 Jan 2025 04:19 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम

सार

नक्सली दंपती को छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘पुनर्वास नीति’’ के तहत दोनों को पृथक-पृथक 25,000-25,000 रुपये (कुल 50,000 रुपये) की प्रोत्साहन राशि तत्काल नगद प्रदान की गई।
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नक्सली दंपती ने किया सरेंडर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कबीरधाम में चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत पुलिस बल द्वारा लगातार भटके हुए नक्सलियों से संपर्क व संवाद किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘नई नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’’ और जिले में चलाए जा रहे नक्सल अभियान के कारण नक्सलियों के हिंसक व शोषणकारी विचारधारा से तंग आकर कई माओवादी समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं। 

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बस्तर क्षेत्र के साथ साथ कबीरधाम जिले में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इस अभियान से प्रेरित होकर 5-5 लाख रुपए के ईनामी नक्सली दंपत्ति रमेश उर्फ मेस्सा (डिप्टी कमांडर, बोड़ला एरिया कमेटी विस्तार प्लाटून नंबर 3) और उसकी पत्नी रोशनी उर्फ हिड़में (सदस्य, बोड़ला एरिया कमेटी विस्तार प्लाटून नंबर 3) ने आज शनिवार को कबीरधाम पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। जिले के एडिशनल एसपी पुष्पेंद बघेल ने बताया कि इन दोनों पर थाना तरेगांव में दर्ज 2-2 नक्सल अपराध दर्ज हैं। 

दोनों आत्मसमर्पित नक्सली, कुख्यात नक्सली कमांडर हिडमा के गांव पूवर्ती के रहने वाले है। रमेश उर्फ मेस्सा ने नक्सली संगठन में डिप्टी कमांडर के रूप में काम करते हुए कई हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया था। पुलिस के साथ मुठभेड़ में शामिल रहा। संगठन में रहने के दौरान एसएलआर राइफल धारी रहा है। वहीं, ’रोशनी उर्फ हिड़में’ संगठन की प्रशिक्षित सदस्य थी, जो नक्सली हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाती रही तथा संगठन में इन्सास राइफल धारी थी। दोनों ने संगठन में व्याप्त आंतरिक संघर्ष, अमानवीय व्यवहार, स्थानीय आदिवासियों पर अत्याचार, और जंगलों में जीवन की कठिनाईयों से परेशान होकर आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।  
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नक्सली दंपत्ति को छत्तीसगढ़ शासन की ‘‘पुनर्वास नीति’’ के तहत दोनों को पृथक-पृथक 25,000-25,000 रुपये (कुल 50,000 रुपये) की प्रोत्साहन राशि तत्काल नगद प्रदान की गई। इसके साथ ही भविष्य में 3 वर्ष तक 10,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड राशि, निःशुल्क आवास एवं भोजन, स्किल डेवलपमेंट हेतु प्रशिक्षण, कृषि भूमि और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अब तक जिले में 8 ईनामी नक्सलियों सहित कुल 9  नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और समाज की मुख्यधारा में जुड़ चुके हैं।

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