इस पूरे मामले की शिकायत मिलने पर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने संज्ञान में लिया। कलेक्टर ने शासकीय उचित मूल्य दुकान की जांच के लिए कवर्धा एसडीएम पीसी कोरी और खाद्य विभाग टीम को जांच के लिए गांव भेजा। जांच के दौरान ग्रामवासी उपस्थित थे। उनसे पूछताछ की गई। एसडीएम पीसी कोरी ने बताया कि सरकारी राशन की दुकान में किसी भी तरह की अनियमितता, राशन की अफरातफरी नहीं हुई है। उनके द्वारा पात्रतानुसार सभी हितग्राहियों को राशन वितरण किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा आपसी सहमति से मवेशियों, बंदरो से खेतों की सुरक्षा के लिए स्थानीय व्यवस्था के अनुसार, काम पर लगाए गए रखवार को चावल दान कर रहें है, जिसे रोका गया।
टीम ने ग्रामवासियों को बताया कि शासकीय उचित मूल्य की दुकान से प्राप्त राशन, खाद्यान्न पोषण युक्त होता है, जिसे घर के खाद्य के लिए ही उपयोग में लाए। टीम द्वारा ग्रामवासियों को समझाइश दी गई कि रखवार को दान में देने के लिए जो भी स्थानीय व्यवस्था हो ग्रामीण अपने घर स्तर पर ही करें। इस प्रकार का कार्य भविष्य में न हो इसके लिए ग्राम पंचायत इंदौरी और शासकीय उचित मूल्य की दुकान इंदौरी को पत्र के माध्यम से आदेशित किया गया। शासकीय उचित मूल्य की दुकान इंदौरी में दुकान में संलग्न कुल राशनकार्ड 1 हजार 932 होने के कारण कलेक्टर ने उक्त दुकान को पृथक कर इंदौरी में दो दुकान आवंटित करने के लिए खाद्य अधिकारी को आदेश दिया। जांच के दौरान जिला खाद्य अधिकारी अरूण कुमार मेश्राम, खाद्य निरीक्षक आकाश भूतड़ा, हिमांशु केशरवानी द्वारा दुकान की जांच की गई।