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Chhattisgarh: सक्ती पुलिस अधीक्षक ने आरक्षक पर लिया एक्शन, वायरल वीडियो के बाद पद से किया निलंबित

Wed, 17 Jun 2026 07:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा

सार

सक्ती जिले में आरक्षक का पुलिस वर्दी में सार्वजनिक स्थान पर संदिग्ध अवस्था में सोते हुए वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आरक्षक तीन जून से ड्यूटी के बाद बिना छुट्टी के अनुपस्थित था।
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निलंबित आरक्षक की फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने रक्षित केंद्र में पदस्थ आरक्षक जगजीवन टोंडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरक्षक का पुलिस वर्दी में सार्वजनिक स्थान पर संदिग्ध अवस्था में पड़े होने का वीडियो सामने आया था। इस घटना से पुलिस विभाग की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही गई है।

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पुलिस विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरक्षक जगजीवन टोंडे को 3 जून 2026 को मालखरौदा क्षेत्र में वारंट पेशी संबंधी ड्यूटी पर भेजा गया था। ड्यूटी पूरी करने के बाद वह रक्षित केंद्र वापस नहीं लौटा। वह 17 जून 2026 तक बिना अनुमति के लगातार अनुपस्थित रहा। 

इसी दौरान सक्ती के बुधवारी बाजार में एक चबूतरे पर पुलिस वर्दी में उसके संदिग्ध अवस्था में सोते हुए दिखने का वीडियो वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से फैल गया। लोगों के बीच इसकी व्यापक चर्चा होने लगी। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि आरक्षक शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर पड़ा हुआ था। यह घटना पुलिस विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई।
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वायरल वीडियो के बाद लिया एक्शन
हालांकि वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियों की अलग से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी विभाग ने इसे पुलिस की छवि को धूमिल करने वाला आचरण माना है। इस घटना से पुलिस बल के अनुशासन पर गंभीर सवाल उठे हैं। विभाग ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। सार्वजनिक स्थान पर पुलिस वर्दी में ऐसी स्थिति में दिखना अस्वीकार्य है।

पुलिस अधीक्षक ने किया निलंबित
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने आरक्षक के कर्तव्य के प्रति उदासीन रवैये को गंभीर माना है। उनकी अनुशासनहीनता और लंबे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने को भी गंभीरता से लिया गया। इन सभी कारणों को देखते हुए आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह आचरण पुलिस विभाग की गरिमा के विपरीत है। यह कार्रवाई अन्य कर्मियों के लिए एक चेतावनी भी है।

निलंबन के बाद शुरू होगी विभागीय जांच
निलंबन के बाद आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। जांच में वायरल वीडियो की सत्यता और आरक्षक की अनुपस्थिति के कारणों की पड़ताल होगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरक्षक पर और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस विभाग अपनी छवि और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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