अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले में एक अनोखी पहल की गई, जहां 12वीं की छात्रा संतोषी धीवर को 15 मिनट के लिए जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया। यह आयोजन यूनिसेफ और पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें पुलिस व्यवस्था की एक झलक दिखाना था।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की 12वीं की छात्रा संतोषी धीवर को पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान, उन्होंने पुलिस विभाग के कार्यों, विशेष रूप से साइबर सुरक्षा और महिला व बच्चों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। पुलिस अधीक्षक बनी छात्रा ने सीएसपी योगिताबाली खापर्डे से साइबर ठगी से लोगों को बचाने के उपायों के बारे में जानकारी ली। सीएसपी ने बताया कि पुलिस विभिन्न माध्यमों जैसे कि जन-जागरूकता शिविरों, सोशल मीडिया और अन्य प्रचार-प्रसार के तरीकों से लोगों को जागरूक कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से ऑनलाइन लेनदेन के दौरान ओटीपी साझा न करने और ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करने की सलाह दी।
इसके अतिरिक्त, छात्रा ने डीएसपी कविता ठाकुर से छेड़खानी जैसे अपराधों में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में जानकारी ली। डीएसपी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज होने के 60 दिनों के भीतर चालान पेश किया जाता है और संवेदनशील मामलों में इसमें कोई देरी नहीं की जाती। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। छात्रा ने दोनों अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।
संतोषी ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के 200 मीटर के दायरे में संचालित होने वाली पान की दुकानों को हटाने का भी निर्देश जारी किया। यह कदम छात्रों के स्वास्थ्य और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस लाइन का अवलोकन करते हुए, छात्रा ने मोटर साइकिल वाहनों की नीलामी से संबंधित प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ कार्यालय प्रेषित किया।
छात्रा ने बयां किया अनुभव
बनारी गांव की रहने वाली 12वीं की छात्रा संतोषी धीवर, जो वर्तमान में जीव विज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं, ने 15 मिनट के पुलिस अधीक्षक बनने के अनुभव को अविस्मरणीय बताया। उनके माता-पिता रोजी-मजदूरी का काम करते हैं। संतोषी ने बताया कि वह भविष्य में आईपीएस बनकर अपने माता-पिता और गांव का नाम रोशन करना चाहती हैं, साथ ही समाज और देश की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त करना चाहती हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय द्वारा आदिवासी गौड़ समाज को अवैध शराब बनाने के धंधे से हटाकर मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें समाज में गर्व से जीने के लिए प्रेरित करने जैसे कार्यों की भी प्रशंसा की।
अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस का महत्व
अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस, जो हर साल 20 नवंबर को मनाया जाता है, बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस प्रकार की पहलें बच्चों को सशक्त बनाने और उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।