फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाल विवाह है गैरकानूनी: घर में लगा था मंडप, तैयारी थी पूरी; अचानक पहुंचे जिला कलेक्टर; जानें फिर क्या हुआ

Fri, 12 Apr 2024 09:16 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा

सार

जिला प्रशासन की सजकता से बाल विवाह को रोका गया। जांजगीर चांपा में दूल्हे की उम्र 18 और दुल्हन की उम्र 17 निकली है। जिसके बाद परिवार को बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी गई।
विज्ञापन
रोका गया बाल विवाह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत के ग्राम टुरी (हीरागढ़) में बाल विवाह को समय रहे हुए जिला प्रशासन ने रोक दिया। 14 अप्रैल से शादी की तैयारी के लिए पंडाल और मंडप छाने की तैयारी चल रही थी। नाबालिक बालिका के घर में जिला प्रशासन और पुलिस टीम पहुंची अंक सूची के आधार पर दूल्हे की उम्र 18 वर्ष 9 माह और दुलहन की उम्र 17 वर्ष 7 माह 13 दिन होने पर नाबालिक बालिका के माता पिता को समझाइश देने के बाद विवाह को रोका गया है। 

विज्ञापन


दरअसल, जिला प्रशासन को सूचना मिली थी कि 14 अप्रैल से ग्राम टुरी (हीरागढ) में नाबालिक कन्या का विवाह होने जा रहा है। सूचना मिलने पर जिला कलेक्टर आकाश छिकारा ने विवाह को रोकने के निर्देश दिए। जिसपर महिला बाल विकास अधिकारी अनीता अग्रवाल और जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेंद्र जायसवाल और पुलिस टीम के साथ नाबालिक कन्या के घर पहुंचे। जहां शादी की तैयारी चल रही थी।

इस दौरान दुल्हन बनने जा रही कन्या की अंक सूची और दूल्हा बनने जा रहे लड़के की अंक सूची के माध्यम से उम्र का सत्यापन किया गया। जिसमे लड़के का उम्र 18 वर्ष 9 माह तथा कन्या का उम्र 17 वर्ष 7 माह 13 दिन दोनो की उम्र विवाह के योगय नहीं होने पर नाबालिक कन्या के माता पिता और परिजनों को मौके से समझाइश दी गई,जिसपर बाल विवाह को रोकने की सहमति जताई। 
विज्ञापन


बाल विवाह के दुष्परिणाम और कार्यवाही से कराया अवगत
इस दौरान मौके पर उपाथित अधिकारियों ने बाल विवाह होने से आने वाली समस्यायों से अवगत करते हुए,कानूनी कार्यवाही के बारे में भी बताया गया। जिसमे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष तथा लड़के की उम्र 21 वर्ष तय किया गया है। निश्चित उम्र से कम स्थिति में बाल विवाह करने पर पुलिस विभाग द्वारा अपराध दर्ज करते हुए विवाह कराने वाले माता पिता और विवाह में सम्मिलित होने वाले रिश्तेदार विवाह करने वाला पंडित के विरुद्ध कार्यवाही होती है। इस अधिनियम के तहत दो वर्ष का कठोर सश्रम का और एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों से सजा सुनाई जाने का प्रावधान है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें