सुकमा जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘लखपति दीदी’ अभियान लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है। जिले में अब तक 5860 महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर ‘लखपति दीदी’ की पहचान हासिल कर चुकी हैं।
इसी अभियान के तहत कोंटा विकासखंड के नक्सल प्रभावित दुब्बाटोटा गांव की निवासी सावलम भीमे आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संघर्ष करते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है।
करीब छह वर्ष पहले सावलम भीमे लिंगेश्वरी महिला स्व सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से मिली ऋण सुविधा का उपयोग उन्होंने आजीविका गतिविधियों में किया। वर्तमान में वे पशुपालन, कृषि और वनोपज आधारित व्यवसाय से जुड़ी हैं। इसके साथ ही इमली और महुआ की खरीदी-बिक्री के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर रही हैं।
जिला प्रशासन द्वारा स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर सामाजिक बदलाव की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। सावलम भीमे की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। आज वे अपने परिवार के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।