सुकमा जिले में बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत प्रशासन ने दो नाबालिग बालिकाओं की शादी समय रहते रुकवाकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने की पहल की है। जागरूकता और समझाइश के जरिए दोनों परिवारों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई, जिसके बाद उन्होंने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।
पहला मामला धुरगुड़ा-पोगाभेज्जी गांव का है, जहां स्थानीय परंपरा के तहत 17 वर्षीय बालिका का विवाह तय किया जा रहा था। सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गांव पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों से चर्चा कर बाल विवाह के दुष्परिणामों और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 की जानकारी दी। समझाइश के बाद परिवार ने विवाह टालने का निर्णय लिया।
दूसरा मामला सिरसेट्टी के पांडुरूपारा का है, जहां 15 जून को एक नाबालिग बालिका का विवाह प्रस्तावित था। विवाह की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं और सामुदायिक भोज की व्यवस्था भी की जा रही थी। प्रशासनिक टीम ने परिजनों को कम उम्र में विवाह से होने वाले स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक प्रभावों के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने विवाह स्थगित करने की सहमति दी। दोनों मामलों में संबंधित पक्षों से घोषणा-पत्र और पंचनामा तैयार कराया गया तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी गई। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता, संवाद और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
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