सुकमा जिले में कभी नक्सलियों की आहट होने पर गाँव के लोग डर के चलते अपने घरों में छुप जाते थे, उसी नक्सली गढ़ में जवानों ने नक्सलियों के टॉप लीडर का खात्मा करने के साथ ही ग्रामीणों को खुली हवा में सांस लेने की आजादी दिलाई।
सुकमा जिले में कभी नक्सलियों की आहट होने पर गाँव के लोग डर के चलते अपने घरों में छुप जाते थे, उसी नक्सली गढ़ में जवानों ने नक्सलियों के टॉप लीडर का खात्मा करने के साथ ही ग्रामीणों को खुली हवा में सांस लेने की आजादी दिलाई, उसी गाँव मे पहली बार ग्रामीणों ने हर्षोल्लास के साथ ही स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाया।
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बता दे कि सुकमा जिले के बड़ेसट्टी पंचायत जहां नक्सलियों के द्वारा राष्ट्रीय तिरंगे की जगह काला झंडा फहराया जाता था, लेकिन अब आजादी के जश्न में गाँव के लोग में रंग गए है, इस स्वतंत्रता दिवस पर यहां पहली बार गांव में तिरंगा लहराएगा गया है, ग्रामीणों ने बताया कि यह जगह है जिसे कभी नक्सलियों के गढ़ के तौर पर जाना जाता था, वही बड़ेसट्टी पंचायत का नाम सुनते ही लोग गोलियों की गड़गड़ाहट से जानते थे, नक्सलियों के द्वारा गांव के स्कूल भवनों को उड़ा दिया गया, छात्रावास ढहा दिए गए और बच्चों को पढ़ाई से दूर करने का हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन इस साल अप्रैल में हालात पूरी तरह बदल गए—जब बचे हुए अंतिम 11 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इसके बाद प्रशासन ने बड़ेसट्टी को आधिकारिक रूप से प्रदेश का पहला नक्सल मुक्त पंचायत घोषित कर दिया, राज्य सरकार की योजना के तहत बड़ेसट्टी इसके बाद केरलापेंदा गांव को नक्सल मुक्त घोषित करते हुए विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया है। सिर्फ चार महीने में बड़ेसट्टी गांव विकास की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है।
गाँव के लोगो ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक स्वतंत्रता दिवस के दिन नक्सली गांव के चौक—चौराहों पर आकर काले झंडे लहराते थे और राष्ट्रीय ध्वज फहराने वालों को जान से मारने की धमकी दिया करते थे, लेकिन आज वक्त बदल गया है, हर घर तिरंगा अभियान के तहत ग्रामीण खुद अपने घरों पर झंडा लगा रहे है।