नक्सलियों के प्रवक्ता ने कुछ दिन पहले 208 नक्सलियों के सरेंडर करने की बात से खफा होकर रूपेश के अलावा अन्य साथियों को सजा देने की बात का जिक्र किया था, इन्हीं 4 पन्नों के पत्र को देखने के बाद रूपेश ने एक वीडियो जारी करते हुए अपनी बात को रखा है।
कई चौंकाने वाले राज खोलते हुए रुपेश उर्फ सतीश ने आत्मसमर्पित सभी 208 साथियों के सामने बैठकर वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया। जिसमें बताया कि हिंसा छोड़कर मुख्य धारा में लौटने का निर्णय अधिकांश नक्सली कैडरों का एक सामूहिक और सोच-समझकर लिया गया फैसला था, जो शांति-प्रगति और सम्मानजनक जीवन में उनके विश्वास को दर्शाता है। कुछ कैडर ही इस निर्णय से असहमत हैं।
सरेंडर किए नक्सली लीडर रुपेश ने बताया कि कई नक्सली अब भी हथियार छोड़ना चाहते हैं, लेकिन संगठन के डर और बदले की आशंका के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि जंगल में रह रहे नक्सलियों को भरोसा दिलाया जाए कि आत्मसमर्पण करने पर उन्हें पूरी सुरक्षा और सम्मान से जीने का मौका मिलेगा।
बता दें कि तेलंगाना में सोनू दादा और उसके बाद जगदलपुर में भूपति के सरेंडर के बाद नक्सलियों ने इनके साथ समर्थन देने वाले सभी साथियों को सजा देने की बात कही है। इस नाराजगी को नक्सलियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने 4 पन्नों का पत्र जारी किया। जारी किए गए अपने पत्र में बताया कि नक्सलियों ने अपने सबसे महत्वपूर्ण पद पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू दादा को बनाया गया था, जहां सोनू दादा ने अपने ही लोगों का साथ छोड़ते हुए अपने 60 साथियों के साथ मिलकर महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार के साथ सरेंडर कर दिया था।
वहीं, इस सरेंडर के एक दिन बाद ही 208 साथियों के साथ भूपति ने जगदलपुर में आकर सरेंडर कर दिया था, इस घटना के बाद से नक्सलियों में काफी नाराजगी देखने को मिली। अपने साथियों के इस हरकत से नाखुश नक्सलियों ने सरेंडर कर चुके सोनू दादा, सतीश और उसके 61 साथियों को सजा देने का फरमान जारी करते हुए 4 पन्नों का पत्र भी जारी किया है। वहीं, नक्सलियों की पार्टी ने इस बात को भी माना है कि उन्होंने सोनू दादा को पोलित ब्यूरो सदस्य का पद भी दे दिया था, इस आत्मसमर्पण के बाद से डीकेएसजेड सी सदस्य विवेक, वैकल्पिक सदस्य दीपा के अलावा 10 संभागभर के ओहदेदारो में काफी नाराजगी देखने को मिली है।