शव दफन विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान
- फोटो : अमर उजाला
नारायणपुर जिले के ग्राम बोरपाल में धर्मांतरण और शव दफन को लेकर चार दिनों से चला आ रहा तनाव प्रशासन की मध्यस्थता और ग्रामवासियों की समझदारी से समाप्त हो गया। इस मामले में आदिवासी समुदाय और ईसाई समुदाय के बीच उपजे मतभेद को आपसी बातचीत और समझ के माध्यम से सुलझा लिया गया। यह घटना नारायणपुर जिले के ग्राम बोरगांव में हुई, जहाँ बिरसिंग कुमेटी नामक व्यक्ति के पिता के निधन के बाद ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
इस घटना की जानकारी मिलते ही गांव में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ग्राम पंचायत बोरपाल के आदिवासी समाज द्वारा इस संबंध में जन आक्रोश रैली और धरना प्रदर्शन भी आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज प्रमुख और पदाधिकारी शामिल हुए। पूर्व में कांकेर जिले के आमाबेड़ा में हुई इसी तरह की घटना को देखते हुए, प्रशासन ने गांव में कड़ी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की थी, जिससे पूरे घटनाक्रम के दौरान शांति बनी रही।
धरना प्रदर्शन के बाद गांव में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में आदिवासी समाज के वरिष्ठजनों ने वीरसिंह के परिवार को समाज की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने और पुनः समाज से जुड़ने की सलाह दी। वीरसिंह के परिवार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए आदिवासी समाज की परंपराओं का पालन करने और समाज में वापसी करने की सहमति जताई। इसके पश्चात, समाज के गायता पटेल द्वारा माटी पूजा संपन्न कराई गई और तिलक लगाकर परिवार का सम्मानपूर्वक समाज में पुनः स्वागत किया गया।
इस अवसर पर वीरसिंह ने कहा कि उनका पूरा परिवार अब पुनः अपने आदिवासी समाज में लौट आया है और वह गांव के नियमों, धर्म व परंपराओं का पालन करते हुए सभी के साथ मिल-जुलकर रहेगा। पिछड़ा वर्ग समाज के अध्यक्ष गुलाब बघेल ने इस घटनाक्रम को आपसी समझ और सामाजिक सौहार्द का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से एक परिवार की घर वापसी हुई है और उन्होंने अपनी आदिवासी परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने का संकल्प लिया है।
समाज के युवा सदस्य मंगऊ राम ने बताया कि वीरसिंह का परिवार पहले आदिवासी समाज से ईसाई समुदाय में शामिल हुआ था और पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए थे। ग्रामीणों की समझाइश के बाद परिवार ने समाज में वापसी का निर्णय लिया, जिसका पूरे गांव ने खुशी-खुशी स्वागत किया।