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Jagdalpur: बसवराजू के मरने के बाद महासचिव पद के लिए आया तिरुपति का नाम, पोती ने दादा से की घर लौटने की अपील

Sat, 31 May 2025 08:09 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर

सार

21 मई को नारायणपुर जिले के सीमा में हुए मुठभेड़ में डीआरजी के जवानों ने जहाँ 28 नक्सलियों को मार गिराया था, जिसमे सभी बड़ी कामयाबी नक्सल संगठन के महासचिव रहे बसवाराजू को भी मार गिराया था।
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नक्सली तिरुपति की पोती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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21 मई को नारायणपुर जिले के सीमा में हुए मुठभेड़ में डीआरजी के जवानों ने जहाँ 28 नक्सलियों को मार गिराया था, जिसमे सभी बड़ी कामयाबी नक्सल संगठन के महासचिव रहे बसवाराजू को भी मार गिराया था। जिसके ऊपर 10 करोड़ से अधिक का इनाम था, इस घटना के बाद महासचिव पद के लिए तिरुपति का नाम सामने आ रहा है। जिसके बाद तिरुपति की पोती ने एक मार्मिक अपील करते हुए अपने दादा को घर वापस आने की बात वीडियो के माध्यम से कही है।

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बताया जा रहा है कि बसवाराजू की मौत के बाद से नक्सलियों की टीम अपने महासचिव की तलाश कर रही थी, इसी तलाश में सबसे बड़ा नाम तिरुपति उर्फ देव जी का नाम सामने आया है, महासचिव पद के लिए तिरुपति के नाम सामने आते ही देव जी की पोती की मार्मिक अपील करते हुए अपने दादाजी के घर लौट आने की बात कही गई है। 

बता दे कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में बसवाराजू के मारे जाने के बाद नक्सली संगठन में महासचिव पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थी,  इसी क्रम में सीसी सदस्य तिरुपति उर्फ देव जी का नाम सामने आया है, इसी बीच देवजी की पोती सुमा ने एक मार्मिक पत्र और वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपने दादा से घर लौटने की अपील की है, तेलुगु भाषा में जारी इस संदेश में सुमा ने कहा प्रिय दादा आपको मेरा प्रणाम, मुझे आपसे मिलने का हमेशा मन करता है लेकिन वह अवसर कभी नहीं मिला। 
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पत्र में सुमा ने हाल की हिंसक घटनाओं पर दुख जताते हुए सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाए, उन्होंने पूछा कि ऑपरेशन कगार क्यों? नक्सलियों के खिलाफ ही इतने अभियान क्यों चल रहे हैं, जबकि विदेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?, सुमा ने कहा कि जब मीडिया में दादाजी का नाम आता है तो गर्व के साथ-साथ पीड़ा भी होती है। अंत में उन्होंने कहा हमारा परिवार दरवाजे पर आपका इंतजार कर रहा है, कृपया लौट आइए, हम आपको प्यार से आमंत्रित करते है, यह संदेश परिवार की भावनात्मक पीड़ा और दादा-पोती के रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।
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