छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में ग्रामीण विकास के कार्यों की सफलता अब पूर्वोत्तर भारत तक गूंज रही है। इसी क्रम में असम राज्य के उच्च अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर का दौरा कर यहां के विकास मॉडल का गहन अध्ययन किया और इसे अपने राज्य में लागू करने की मंशा जाहिर की। संयुक्त आयुक्त श्री ध्रुव ज्योति नाथ और उपायुक्त राजेंद्र पांडे के नेतृत्व में पहुंचे इस दल ने लोहंडीगुड़ा विकासखंड के वनांचल क्षेत्रों का भ्रमण कर जमीनी हकीकत परखी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से सीधा संवाद
लोहंडीगुड़ा के ग्राम पंचायत दाबपाल, एरंडवाल और छोटे परोदा में भ्रमण के दौरान असम के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के गृह प्रवेश कार्यक्रम में भाग लिया। सुदूर वन क्षेत्रों में बने पक्के मकानों को देखकर अधिकारी अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने फीता काटकर हितग्राहियों को चाबियां सौंपी और उनसे आत्मीय संवाद किया। हितग्राहियों के चेहरों की मुस्कान और उनके जीवन में आए बदलावों की कहानियों ने योजनाओं की सफलता को दर्शाया।
आजीविका डबरी से आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर
आवासों के निरीक्षण के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मनरेगा के तहत निर्मित 'आजीविका डबरी' स्थलों का भी जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आर्थिक सशक्तिकरण का मंत्र देते हुए कहा कि डबरी का उद्देश्य केवल जल संचय नहीं, बल्कि आय का स्रोत बनना होना चाहिए। उन्होंने मछली पालन, बत्तख पालन और अन्य कृषि गतिविधियों को जोड़कर 'समन्वित खेती' का मॉडल अपनाने का सुझाव दिया, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।
बस्तर मॉडल को असम में अपनाने की पहल
दौरे के अंत में असम के अधिकारियों ने बस्तर में चल रहे कार्यों को एक 'सफल मॉडल' बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि असम और बस्तर की भौगोलिक चुनौतियां काफी हद तक समान हैं और बस्तर द्वारा इन चुनौतियों के बीच विकास का रास्ता निकालना अनुकरणीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर के इस मॉडल को असम के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनाया जाएगा। इस भ्रमण में स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।