नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु नहीं मानने वाले बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने महंत को खुली चुनौती देते हुए अपने जगद्गुरु होने का पूर्ण परीक्षण करने को कहा। यह बयान चिरमिरी के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में श्री रामकथा के नौवें दिन व्यासपीठ से दिया गया।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने जगद्गुरु होने का मूल कारण बताया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु के लिए तीन ग्रंथों का भाष्य लिखना अनिवार्य है। सभी अखाड़े इस नियम का समर्थन करते हैं और वह सभी कसौटी पर खरे उतरते हैं। रामभद्राचार्य ने कहा कि महंत को "मिर्च लग रही है"। उन्होंने यह भी कहा कि जो राम जी से प्रेम करेगा, उसे उनका आशीर्वाद मिलेगा। रामभद्राचार्य ने महंत को वह दिन याद दिलाया जब निहत्थे रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलवाई गई थीं। उन्होंने पूछा कि जब वे रामजन्मभूमि के लिए महीनों जेल में थे, तब महंत ने क्या किया। उन्होंने महंत पर देश को गर्त में ले जाने और देश का विभाजन करवाने का आरोप भी लगाया।
महंत पर गंभीर आरोप
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने चरणदास महंत पर देश को टुकड़ों में बंटवाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जोगी थोड़े अच्छे थे, लेकिन उनके बाद के लोग असभ्य हैं। संतों के बारे में कैसे बोला जाता है, इसका उन्हें सामान्य ज्ञान तक नहीं है। रामभद्राचार्य ने प्रतिपक्ष नेता को फिर से खुली चुनौती दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ऐसे ही जगद्गुरु नहीं हैं।
अपनी योग्यता का बखान
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपनी योग्यता बताते हुए कहा कि वह 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकते हैं। उन्होंने अपनी विद्वत्ता और ज्ञान का प्रमाण प्रस्तुत किया। व्यासपीठ से दी गई उनकी नसीहत और चुनौती को भक्तों ने "जय श्री राम" के नारों से विस्तार दिया। भक्तों ने जगद्गुरु के वाणी का जोरदार समर्थन किया। यह घटनाक्रम राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।