छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। किरंदूल स्थित आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील (एएमएनएस) प्लांट से निकलने वाला औद्योगिक ठोस अपशिष्ट टेलिंग्स अब बिना किसी अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया के सड़क किनारे खुले गड्ढों में डंप किया जा रहा है। ताजा मामला मसेनार गांव का है, जहां सड़क किनारे बने एक गड्ढे में करीब तीन ट्रक टेलिंग्स डंप किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस घटना के बाद जिले में टेलिंग्स परिवहन और डंपिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार बिना किसी डर के सार्वजनिक स्थानों और आबादी के पास औद्योगिक कचरा फेंक रहे हैं। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि या तो ठेकेदारों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं है या फिर कंपनी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। जिस तरह खुले स्थानों पर कचरा डंप किया जा रहा है, वह न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और पर्यावरण विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन भी है।
जानकारी के अनुसार दंतेवाड़ा जिले में इन दिनों लाखों टन टेलिंग्स अलग-अलग इलाकों में डंप किया जा रहा है। कई जगहों पर जैविक और उपजाऊ भूमि को भी इस औद्योगिक कचरे से भर दिया गया है, जिससे खेती योग्य जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इससे पहले डंकनी नदी के किनारे लगभग एक लाख टन टेलिंग्स डंप किए जाने का मामला सामने आ चुका है, जिससे नदी के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया था। अब यही कचरा सड़क किनारे खुले गड्ढों में भरा जा रहा है।
मसेनार गांव में जिस स्थान पर टेलिंग्स डंप किया गया है, वहां से कुछ ही दूरी पर एक नदी बहती है। जबकि नियमों के अनुसार किसी भी नदी से कम से कम 300 मीटर और तालाब से 100 मीटर की दूरी पर ही औद्योगिक कचरे का भंडारण किया जा सकता है। इसके बावजूद नियमों को नजरअंदाज कर खुलेआम डंपिंग की जा रही है, जिससे जमीन और जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है।
एनजीटी ने टेलिंग्स के परिवहन, भंडारण और निपटान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं। बावजूद इसके दंतेवाड़ा जिले में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्थिति में टेलिंग्स को खुले में डंप नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे मिट्टी, भूजल और आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है।
मामले को लेकर एएमएनएस के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि किसी ठेकेदार द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कंपनी का दावा है कि ठेकेदारों को केवल स्वीकृत और निर्धारित स्थलों पर ही टेलिंग्स डंप करने की अनुमति दी जाती है।
नियमों के अनुसार औद्योगिक कचरा डंप करने से पहले पर्यावरण विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। इसके लिए स्थल का निरीक्षण किया जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत तथा शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका की अनुमति आवश्यक होती है। इसके साथ ही जैव विविधता बोर्ड की निगरानी भी जरूरी होती है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही प्रशासन की स्वीकृति से ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी किया जाता है। लेकिन दंतेवाड़ा में हालात यह हैं कि जहां भी खुले गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, वहां बिना एनओसी और वर्क ऑर्डर के टेलिंग्स डंप किया जा रहा है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।