धमतरी जिले के कुरुद विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अजय चंद्राकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में वह खेतों में पानी छोड़ने को लेकर सिंचाई विभाग के एक अधिकारी से फोन पर बातचीत के दौरान विवादित टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं।
विधायक ने अधिकारी से बातचीत के दौरान कहा कि यदि वह सामने दिखता तो उसे वहीं पर गाड़ देते। विधायक ने अधिकारी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए किसानों के खेतों तक तुरंत पानी पहुंचाने का निर्देश दिया।
नहर से पानी छोड़ने की मांग
मामला जिले के मगरलोड क्षेत्र के गांव परेवाडीह का है। गांव के किसान फसल सिंचाई के लिए पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। बारिश के बाद खेतों में भरा पानी बह गया था और नहर का एक हिस्सा भी टूट गया था। ग्रामीणों के अनुसार नहर की मरम्मत के समय पर्याप्त मिट्टी नहीं डाली गई, जिससे पानी का बहाव धीमा हो गया था। मगरलोड जनपद अध्यक्ष वीरेंद्र साहू ने बताया कि करीब 100 एकड़ फसल को पानी की तत्काल जरूरत थी। इस विषय में जिला पंचायत में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद सिंचाई विभाग के एक अधिकारी को निरीक्षण के लिए गांव भेजा गया।
अधिकारी के रवैये पर भड़के विधायक
गांव पहुंचे अधिकारी ने कथित तौर पर पानी मांग रहे ग्रामीणों पर नेतागिरी करने का आरोप लगाया। इसी बीच ग्राम परेवाडीह में एक सीआरपीएफ जवान के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे विधायक अजय चंद्राकर को किसानों ने इस समस्या की जानकारी दी। किसानों की बात सुनकर विधायक ने सीधे सिंचाई विभाग के अधिकारी को फोन मिला दिया। 'ऑफिस ऑफ अजय' नाम के इंस्टाग्राम पेज से साझा किए गए वीडियो में विधायक अधिकारी को फटकार लगाते दिख रहे हैं। उन्होंने बातचीत में कहा कि प्रशासन की छवि खराब करने वाले अधिकारियों को मैदान में नहीं भेजा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने किया जमकर पलटवार
वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस बयान को लेकर विधायक पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने के कारण विधायक हताशा में हैं और लगातार अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले पर ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विधायक को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में जाकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए और कुछ समय विश्राम करना चाहिए। वरिष्ठ नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ने से राज्य को नुकसान पहुंच सकता है।