मामला तब उजागर हुआ जब गंडई निवासी अफसार खान के पास एक पार्सल पहुँचा। बाहर से वह बिल्कुल नया होम थिएटर लग रहा था,लेकिन उसे उठाते ही अफसार को शक हुआ। स्पीकर असामान्य रूप से भारी था और पावर पिन टूटा हुआ दिख रहा था। पेशे से इलेक्ट्रिशियन अफसार की नज़र तुरंत खतरे पर गई। उसने सावधानी से पार्सल खोला तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। स्पीकर के भीतर से जिलेटिन की छड़ें और तारों से जुड़ा डिटोनेटर निकला। उसने तुरंत पुलिस को खबर दी।
सूचना मिलते ही पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुँचकर पूरे क्षेत्र को सील कर दिया। जांच में पता चला कि स्पीकर के अंदर छिपाया गया विस्फोटक इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि जैसे ही उसे बिजली के स्रोत से जोड़ा जाता करंट सीधे डिटोनेटर तक पहुँचकर जोरदार धमाका कर देता। विस्फोट की स्थिति में स्पीकर का आवरण ही घातक छर्रों में बदल जाता। यह पूरा आईडिया किसी फिल्मी सीन जैसा था,लेकिन हकीकत कहीं ज्यादा खतरनाक।
पुलिस की पड़ताल ने इस मामले के पीछे की गुत्थी खोली। मास्टरमाइंड विनय वर्मा ने इंटरनेट से ट्यूटोरियल देखकर आईईडी तैयार किया था, उसका मकसद अपनी प्रेमिका के पति अफसार खान की हत्या करना था, लेकिन इस साजिश का एक और बड़ा पहलू सामने आया। विनय अकेला नहीं था,उसके साथ कई लोग शामिल थे जिन्होंने कई तरह से उसकी मदद की।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस बम में इस्तेमाल जिलेटिन दुर्ग जिले की पत्थर खदानों से अवैध रूप से लाया गया था,पुलिस ने इस केस में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें आईईडी तैयार करने वाला,फाइनेंसर,डिलीवरी में मददगार,सप्लायर और यहां तक कि फर्जी इंडिया पोस्ट लोगो बनाने वाला भी शामिल है। आरोपियों के ठिकानों से 60 जिलेटिन स्टिक और दो डिटोनेटर बरामद हुए। पुलिस अधीक्षक लक्ष्य विनोद शर्मा ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया। उनके अनुसार यह केवल एक नियोजित हत्या की साजिश को नाकाम करने भर की बात नहीं है, बल्कि अवैध विस्फोटक आपूर्ति के एक पूरे नेटवर्क को उजागर करने वाली घटना है। सभी आरोपियों पर हत्या की साजिश,विस्फोटक अधिनियम और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।