छत्तीसगढ़ में तंत्र-मंत्र के लिए एक बच्चे की बलि के मामले में सात लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई गई है।
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दुर्ग के जिला एवं सत्र न्यायाधीश गौतम चौरड़िया ने तीन साल पुराने इस मामले को क्रूरतम व अमानवीय ठहराते हुए कहा है कि इस तरह के मामले में दोषियों को फांसी देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
मामला भिलाई के रूआबांधा का है, जहां एक मजदूर दंपत्ति पोषण राजपूत और दुर्गा राजपूत का डेढ़ साल का बेटा चिराग 23 नवंबर 2010 की दोपहर को लापता हो गया था।
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लौटे में मिला खून
पुलिस के अनुसार मज़दूर दंपत्ति ने मोहल्ले वालों के साथ लापता बच्चे की तलाश की लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। इसके बाद वे मोहल्ले में ही रहने वाले तांत्रिक ईश्वरी यादव के घर पहुंचे, जहां तेज़ स्वर में गाना-बजाना हो रहा था।
मोहल्ले के लोगों ने पाया कि ईश्वरी तंत्र साधना में जुटा हुआ था और उसके सामने ही एक लोटे में खून भरा हुआ था। ईश्वरी के साथ उसकी पत्नी और बच्चों के अलावा कुछ दूसरे शिष्य भी मौके पर उपस्थित थे।
मोहल्ले के लोगों ने जब ईश्वरी यादव पर दबाव बनाया तो उसने स्वीकार किया कि उसने अपनी कथित तंत्र शक्ति को बढ़ाने और उन्हें अपने बच्चों को भी हस्तांतरित करने के लिए डेढ़ साल के चिराग की जीभ और गला काट कर अपने देवता को बलि दे दी है।
तांत्रिक शक्ति बढ़ाने के लिए हत्या
इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। बाद में वहीं पास से ही ज़मीन को खोद कर दो हिस्सों में बंटे हुए मासूम चिराग के शव को बरामद किया गया।
पुलिस ने इस मामले में 11 लोगों के ख़िलाफ़ अपहरण, तंत्र-मंत्र के लिए हत्या और साक्ष्य छुपाने का मामला दर्ज किया, जिसमें तीन नाबालिग भी शामिल थे।
दुर्ग ज़िला न्यायालय के लोक अभियोजक सुदर्शन महलवार के अनुसार, "इस मामले में 11 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया था। घटना के मुख्य आरोपी ईश्वर यादव ने तांत्रिक शक्ति बढ़ाने के लिए घटना को अंजाम दिया था। उनके साथ उसके शिष्य भी इस अपराध में शामिल थे।"
नाबालिग भी हैं शामिल
महलवार के अनुसार, "मुख्य आरोपी ईश्वर यादव और उसकी पत्नी किरण यादव के अलावा इस मामले में ईश्वर यादव के मित्र महानंद यादव, राजेन्द्र महार, सुखदेव यादव, हेमंत साहू व अजय यादव ने भी बराबर की हिस्सेदारी निभाई थी।"
इस मामले में आरोपी तीन नाबालिग बच्चों का मामला स्थानीय किशोर न्यायालय में चल रहा है।
पुलिस का आरोप है कि तांत्रिक ईश्वर यादव ने इससे पहले भी एक बच्चे की बलि दी थी। बलि के उस मामले में 5 अन्य लोग भी शामिल थे, जिस पर 30 मार्च को फ़ैसला आ सकता है।
कोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के डॉक्टर दिनेश मिश्र ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में कड़ी सज़ा अनिवार्य है, लेकिन जब तक समाज और सरकार की जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक ऐसे मामलों को रोक पाना संभव नहीं है।
डॉक्टर दिनेश मिश्र ने कहा, "हर टीवी चैनल पर एक-एक बाबा बैठ कर काम करने के बजाए तंत्र-मंत्र-यंत्र को ही सफलता का राज़ बता रहे हैं।
संचार के इस माध्यम का ऐसा दुरुपयोग गांव के लोगों को आसानी से भ्रमित करता है। यही कारण है कि हाल के दिनों में भूत-प्रेत और तंत्र-मंत्र की घटनाओं में और बढ़ोत्तरी हुई है। इस पर रोक ज़रूरी है।"