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Chhattisgarh: बजट सत्र में नक्सल पुनर्वास पर सरकार का ब्यौरा, 2937 आत्मसमर्पण, 49.34 करोड़ इनाम राशि शेष

Thu, 26 Feb 2026 04:04 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से पुनर्वास नीति, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या और इनामी राशि के वितरण की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मांगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से पुनर्वास नीति, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या और इनामी राशि के वितरण की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मांगी।
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जवाब में गृह मंत्री विजय शर्मा ने आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि 9 फरवरी 2026 तक कुल 2937 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 1496 इनामी नक्सली शामिल हैं। सरकार का दावा है कि यह संख्या राज्य में चलाए जा रहे आत्मसमर्पण अभियान की सफलता को दर्शाती है।

पुनर्वास नीति में क्या प्रावधान?
गृह मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को प्रारंभिक सहायता राशि, कौशल प्रशिक्षण, आवास, आजीविका के साधन और सुरक्षा प्रदान की जाती है। अब तक प्रारंभिक सहायता के रूप में 5 करोड़ 64 लाख रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
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हालांकि, इनामी नक्सलियों को दी जाने वाली 49 करोड़ 34 लाख रुपये की राशि अभी शेष है। मंत्री ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए राशि बैंक खातों में जमा की जा रही है, जिसे वे तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद निकाल सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे मुख्यधारा में स्थायी रूप से जुड़ें और पुनः हिंसक गतिविधियों की ओर न लौटें।

विपक्ष ने क्या पूछा?
विधायक विक्रम मंडावी ने यह भी जानना चाहा कि कितने इनामी नक्सलियों को अब तक पूरी राशि दी जा चुकी है और किन मामलों में भुगतान लंबित है। इस पर सरकार ने कहा कि प्रक्रिया चरणबद्ध है और पात्रता के अनुसार भुगतान किया जा रहा है।

सरकार का दावा
सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पुनर्वास नीति के संयोजन से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों को समाज में पुनर्स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से रोजगारपरक योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। सदन में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच संक्षिप्त बहस भी हुई, जिसमें पुनर्वास की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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