छत्तीसगढ़ के सरगुजा इलाके में रहने वाले दो युवा भाई जो आपस मामा और बुआ के बेटे है साइकिल से ही 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा करने का प्रोग्राम बनाया और निकल पड़े और 10 माह में अपनी यात्रा को पूरी कर अमरकटक होते हुए पेंड्रा से अपने गृह ग्राम सरगुजा के लिए रवाना हो गए। इस दौरान दोनों भाइयों ने यात्रा के अनुभव को साझा किया।
दरअसल छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले जमदई गांव में रहने वाले नूदा दानेश्वर यादव एवं अंबिकापुर के मैनपाट के रहने वाले प्रवीण यादव जो कि दोनों मामा और बुआ के बेटे हैं जिन्होंने सायकल से पूरे 12 ज्योतिर्लिंग और चार धामों की यात्रा का प्रोग्राम बनाया और पिछले साल यह दोनों भाई 29 सितंबर 2024 को 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा के लिए निकल गए आज दोनो भाई अपनी यह यात्रा पूरी कर अपने घर की ओर प्रस्थान इस दौरान आख़िरी पड़ाव अमरकण्टक से दर्शन कर वापस सरगुजा जाने को निकले इस दौरान दोनों भाइयों ने अपने यात्रा का अनुभव हमसे साझा किया। मैनपाट अम्बिकापुर के रहने वाले प्रवीण कुमार से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा 13 राज्यों में घूमने का अवसर प्राप्त हुआ।
जहां हर राज्य में अलग-अलग तरह के लोग हमें मिले थे। साथ ही नेपाल भी घूमने का मौका हमें मिला था। वही 12 ज्योतिर्लिंग घूमने के साथ ही अलग-अलग तीर्थ स्थान, शक्तिपीठ एवं अन्य जगहों पर घूमने का अवसर प्राप्त हुआ था।। वही तिरंगे झंडे को लेकर उन्होंने कहा कि हम यात्रा में निकले हैं कि यह झंडा हमारे देश एवं हमारी पहचान बनाती है। उन्होंने कहा कि हमने अपने सनातन धर्म के लिए यात्रा की है जो कि हमारी यात्रा सफल थी।।तो सूरजपुर नुदा दानेश्वर यादव जो जमदई गांव के रहने वाले है उन्होंने बताया कि 29 सितंबर 2024 को हमारे द्वारा 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए निकले हुए थे। जहां नौ महीनो की यात्रा के दर्शन के बाद अब हम वापस अपने गांव घर की ओर जा रहे हैं। जहां हमारे द्वारा ओंकारेश्वर, बाबा महाकाल, रामेश्वरम, काशी विश्वनाथ, नागेश्वर, द्वारकाधीश, सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, तिरुपति बालाजी, भीमाशंकर, त्रंबकेश्वर, गिरदेश्वर, जगन्नाथ पुरी, बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर, अयोध्या ऋषिकेश हरिद्वार केदारनाथ बद्रीनाथ नीम करोली बाबा, नेपाल बाबा पशुपतिनाथ, विंध्याचल, अमरकंटक विभिन्न तीर्थ स्थानो का दर्शन किया था। वही चारधाम की यात्रा कहां से प्रेरणा मिली जिसे लेकर उन्होंने कहा कि दो साल से हम यात्रा करने की सोच रहे थे अब जाकर बाबा ने हमें बुलाया और हम यात्रा पर निकल गए।
साइकिल से यात्रा करने पर प्रकृति की उसे खूबसूरत दृश्य का आनंद लेते हुए चलेंगे, अपने भारत को अच्छे से देख पाएंगे और समझ पाएंगे कि किस राज्य में कैसे लोग हैं यह यह सब जानने की इच्छा मिली, बाबा के आशीर्वाद से सभी जगह दर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ।। अब इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से विभिन्न तरह के साधन होने के बावजूद भी इन दोनों युवाओं के द्वारा साइकिल से 12 ज्योतिर्लिंग एवं चार धामों की यात्रा पूरी की गई है।