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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: तालाब की मेड़ पर खुदाई कर बाहर ले जा रहे मुरुम, ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

Sat, 19 Sep 2026 08:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

सार

मरवाही के झिरनापोंड़ी में पुराने सामुदायिक खरिखांडा तालाब की मेड़ पर भारी मशीनों से खुदाई के निशान मिले हैं। ग्रामीणों ने मुरुम बाहर ले जाने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है और पूछा है कि आखिर तालाब की मेड़ खोदने की अनुमति किसने दी।
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जनपद पंचायत कार्यालय, मरवाही
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विस्तार
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जनपद पंचायत मरवाही में ग्राम पंचायत नरौर के ग्राम झिरनापोंड़ी में पुराने सामुदायिक खरिखांडा तालाब की मेड़ पर बड़े पैमाने पर खुदाई किए जाने का मामला सामने आया है। तालाब की मेड़ धीरे-धीरे खोदे जाने से उसके अस्तित्व और सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों तक जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनों से खुदाई की गई और मेड़ से निकाली गई मुरुम को बाहर ले जाया गया।

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मौके पर अब भी मुरुम के बड़े-बड़े ढेर, गहरे गड्ढे और भारी मशीनों के टायरों के निशान दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी छोटे-मोटे कार्य का हिस्सा नहीं, बल्कि लंबे समय तक मशीनों के माध्यम से की गई खुदाई प्रतीत होती है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि तालाब की मेड़ की खुदाई किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से कराई गई।

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मामले को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तालाब के पास मनरेगा नवीनीकरण कार्य का सूचना पटल लगा हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक सरकारी योजना के तहत तालाब के नवीनीकरण की जानकारी प्रदर्शित की गई है, लेकिन उसी के सामने तालाब की मेड़ को खोदकर क्षतिग्रस्त किए जाने के निशान मौजूद हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मौके पर वास्तव में कौन-सा कार्य कराया गया और उसकी अनुमति किस स्तर से दी गई थी। साथ ही कार्य के लिए जारी आदेश और तकनीकी स्वीकृति की भी जांच की जाए।

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ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय मशीनों से खुदाई और मुरुम की ढुलाई होती रही। इसके बावजूद पंचायत स्तर से लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों तक समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार तालाब गांव की सामुदायिक संपत्ति और महत्वपूर्ण जलस्रोत है। मेड़ कमजोर होने से बारिश के दौरान पानी के दबाव में तालाब को नुकसान पहुंचने की आशंका है। सबूत के तौर पर ग्रामीणों ने मौके के फोटो और वीडियो भी सामने रखे हैं। उन्होंने संबंधित विभाग से स्थल निरीक्षण कर खुदाई की अनुमति, कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति और मुरुम की निकासी से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।



ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य सरकारी योजना के तहत कराया गया है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। वहीं यदि बिना अनुमति खुदाई की गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

 

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