जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत का सनसनी खेज मामला सामने आया है। मामले में प्रसव और उपचार में लापरवाही की वजह से जच्चे और बच्चे की मौत हो गई। प्रसव के दौरान प्रसूता को उप स्वास्थ्य केंद्र निमधा में 19 घंटे रखा गया। जहां प्रसव के दौरान पहले नवजात की मौत हुई। बाद में अत्यधिक रक्त स्राव के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया और जिला अस्पताल में इलाज के दौरान प्रसूता की भी मौत हो गई।
इस दौरान प्रसूता को सरकारी महतारी वाहन तक उपलब्ध कराया गया। निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचने के बाद आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई। मामले में उप स्वास्थ्य केंद्र पर लापरवाही का आरोप लग रहा है। महिला को सुरक्षित प्रसव के लिए लाया गया। लेकिन उसे क्या पता था कि जहां वह सुरक्षित प्रसव के लिए लाई गई है। वहीं उसकी जान से खिलवाड़ चल रहा है।
दरअसल उप स्वास्थ्य केंद्र में कल सुबह 10 बजे प्रसव के लिए भर्ती बुधवार को 19 घंटे रखने के दौरान जब अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा, तो कुछ घंटे रक्त स्राव रोकने के लिए इंजेक्शन दवाइयां दी गई। लेकिन पर्याप्त स्वास्थ्य व्यवस्था न होने के बावजूद उसे समय रहते जिला अस्पताल रेफर नहीं किया।
जिसकी वजह से उप स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त स्वास्थ्य कर्मी न तो बच्चे की जान बचा पाई। न ही रक्तस्राव रोक पाई। लगातार बढ़ते रक्त स्राव के बाद जब स्वास्थ्य कर्मी को एहसास हुआ कि प्रसूता की जान जा सकती है। तब उसने आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। लेकिन रात को 3:00 बजे कोई सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया।
इसके बाद पीड़ित परिवार ने खुद निजी वाहन की व्यवस्था की और जिला अस्पताल पहुंचे। जहां लगभग 4:45 में जिला अस्पताल पहुंचने के बाद 5:15 पर प्रसूता की मौत हो गई। जिला अस्पताल में चिकित्सा प्रसूता की मौत के पीछे अत्यधिक रक्तस्राव को वजह बता रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव होने की वजह से उसकी मौत हुई है। जब जिला अस्पताल लाया गया। तब उसे सभी जरूरी उपचार उपलब्ध कराए गए। लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। जच्चे और बच्चे की मौत से दोनों परिवार पूरी तरह उजड़ गया है क्योंकि प्रसूता बुधवार या अपने मां-बाप की एकलवती संतान थी। वहीं प्रसूता का खुद का परिवार भी उसकी मौत के साथ उजड़ गया।