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GPM: लंपी वायरस ने पसारे पैर, सड़कों में घूम रहे वायरस से प्रभावित मवेशी, पशु चिकित्सा विभाग नहीं दे रहा ध्यान

Sun, 27 Aug 2023 02:27 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेण्ड्रा मरवाही

सार

लंबी वायरस से प्रभावित जानवरों की मौत होने की दशा में सरकारी मुआवजे का प्रावधान भी नहीं है जिले के तीनों विकासखंड में इन दिनों लंपी वायरस से प्रभावित मवेशी सड़क में ही देखे जा सकते हैं।
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लंपी वायरस ने पसारे पैर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गोवंश में लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है जगह-जगह लंबी वायरस से प्रभावित मवेशी सड़क किनारे घूमते दिखाई दे रहे हैं । लंबी वायरस से गोवंश के शरीर में सैकड़ों घाव हो गए हैं लगभग एक साल का समय बीतने के बावजूद पशु चिकित्सा विभाग ने अब तक टीकाकरण का कार्य  पूरा नहीं किया है। ऐसे में विभाग से इन मवेशियों के उपचार की अपेक्षा करना बेमानी होगी। 

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लंपी वायरस जिसे लंपी त्वचा रोग वायरस के रूप में भी जाना जाता है। वास्तव में एक प्रकार का प्राक्सवायरस है जिससे गोवंश एवं महिषवंश बुरी तरह संक्रमित हो जाते हैं इस बीमारी से मवेशियों के शरीर में गांठ बन जाती है जो बाद में घाव का रूप ले लेती है यह घाव मवेशी के पूरे शरीर में काफी तेजी से फैलता है। मतलब एक जानवर के शरीर में सैकड़ों घाव बन जाते हैं जिससे मवेशी को बुखार आ जाता है, भूख नहीं लगती, नाक बहने लगती है, आंख से पानी आने लगता है, इससे संक्रमित जानवर की सही उपचार न मिलने से मौत भी हो सकती है।  

 

लंबी वायरस से प्रभावित जानवरों की मौत होने की दशा में सरकारी मुआवजे का प्रावधान भी नहीं है जिले के तीनों विकासखंड में इन दिनों लंपी वायरस से प्रभावित मवेशी सड़क में ही देखे जा सकते हैं। खासकर मरवाही ब्लॉक के धनपुर धोबहर सिलपहरी में, पेंड्रा में पेंड्रा शहर के आसपास के गांव , गौरेला विकासखंड के कई गांव में लंपी वायरस से मवेशियों की मौत भी हुई है, पशुपालक मवेशियों में लंबी वायरस का प्रकोप देखकर काफी चिंतित और परेशान है पर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं। 

एक वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ में लंपी वायरस का मामला सामने आने के बाद से पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग ने एहतियातन कदम उठाने के साथ इस रोग से बचने के लिए जमीनी अमले को बड़े पैमाने पर टीकाकरण करने का लक्ष्य दिया था। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में लगभग 190000 मवेशी हैं पर बीते एक साल में पशु चिकित्सा विभाग ने सिर्फ 150000 मवेशियों का ही टीकाकरण पूर्ण किया है। बीमारी को देखकर पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अपना ही तर्क देते हैं पर पशु चिकित्सा विभाग की लचर व्यवस्था का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि बीते एक साल में टीकाकरण के शत-प्रतिशत लक्ष्य को भी विभाग पूर्ण नहीं कर सका। 

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भौगोलिक रूप से गोरेला पेंड्रा मरवाही जिला छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिला है ऐसे में यहां पड़ोस के राज्य से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है इसके बावजूद एक साल में टीकाकरण के शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त नहीं करना विभाग के जमीनी अमले का पशुंधन के प्रति उदासीनता एवं विफलता दर्शाता है। यह आलम तब है जब छत्तीसगढ़ सरकार पशुधन विकास पर विशेष जोर दे रहा है। 

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