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जीपीएम: जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- धर्म परिवर्तन रोकना हम सबकी जिम्मेदारी, पढे़ं

Wed, 29 Oct 2025 08:00 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

सार

पेंड्रा नगर के हाई स्कूल मैदान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर, पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं की अमृतमयी कथा का वाचन किया।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पेंड्रा नगर के हाई स्कूल मैदान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर, पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं की अमृतमयी कथा का वाचन किया। कथा श्रवण के दौरान उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे हिन्दू समाज के धर्म परिवर्तन को समय रहते रोकना प्रत्येक सनातनी की जिम्मेदारी है। यदि अब भी समाज नहीं जागा तो आने वाले समय में विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा।

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जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि यह श्रीमद्भागवत कथा छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए भारत माता के सपूतों को समर्पित है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सोलह कलाओं से पूर्ण हैं। भगवान श्रीराम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम न पहले हुए हैं और न आगे होंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटना, तीन तलाक बिल का पारित होना और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण — यह सब सनातन की पुनर्स्थापना के प्रतीक हैं। आने वाले समय में भगवान श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर का निर्माण भी अवश्य होगा।

जगतगुरु ने प्रवचन के दौरान कहा कि “जिसकी कथनी और करनी में अंतर हो, उसे कभी आदर्श नहीं मानना चाहिए। धर्मपत्नी की पहचान संकट के समय होती है, और ज्ञानी की पहचान भागवत कथा में होती है।” उन्होंने बताया कि अब तक उन्होंने 275 से अधिक ग्रंथों की रचना की है और निरंतर अध्ययन एवं लेखन ही उनके जीवन की प्रेरणा है। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और कथा श्रवण कर धर्म और भक्ति का रसपान किया। भक्तों ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना और आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा जगतगुरु रामभद्राचार्य जी का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया।
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कथा स्थल पर प्रकाश, पेयजल, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात के उचित प्रबंध किए गए हैं। सात दिवसीय यह आयोजन पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का वातावरण बनाए हुए है।

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