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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: करमडार महोत्सव में झलकी आदिवासी संस्कृति, कलेक्टर ने मांदर बजाकर किया करमा नृत्य

Tue, 27 Oct 2026 09:14 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

सार

जल, जंगल, जमीन और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाले करमडार महोत्सव में कलेक्टर ने ग्रामीणों के साथ मांदर बजाया और करमा नृत्य में हिस्सा लिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर महिला, पुरुष और बच्चों ने भी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी।
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मांदर की थाप पर प्रस्तुति देते जिला कलेक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गौरेला के ग्राम जोगीसार में आदिवासी समाज का प्रमुख प्रकृति पर्व करमडार महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देने वाले इस पर्व में करम देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। महोत्सव में जिला कलेक्टर विजय दयाराम के. मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा ने की।

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कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच गौतम भानू, आयोजन समिति के अध्यक्ष जनभान सिंह पैकरा, लखन गौटिया, दिल प्रसाद पैकरा, डॉ. जलेश्वर पैकरा, गुजरात पैकरा, सुरेंद्र राठौर, विजय राठौर तथा आयुष चिकित्सा विभाग के जिला अधिकारी डॉ. कैलाश सिंह मरकाम सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 

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महोत्सव में ग्रामीणों ने मांदर, ढोल, मंजीरा और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर करमा नृत्य प्रस्तुत किया। महिलाओं ने अपने भाइयों की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उपवास रखा और पूजा-अर्चना की। रात्रि में आयोजित करमा नृत्य में बच्चे, युवा और बुजुर्ग उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

इस दौरान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने ग्रामीणों के साथ मांदर बजाकर करमा नृत्य में सहभागिता निभाई। कलेक्टर को पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाते और ग्रामीणों के साथ नृत्य करते देख लोगों में खासा उत्साह नजर आया।
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जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा ने आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और सामुदायिक एकजुटता के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। ग्रामवासियों के सामूहिक प्रयास से आयोजित इस महोत्सव ने पारंपरिक आदिवासी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।

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