बारिश कम होने के कारण खेतों में पड़ी दरारें।
- फोटो : संवाद
छत्तीसगढ़ का गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला धान की सुंगधित किस्मों के लिए जाना जाता है। इस बार देरी से आए मानसून के बाद बादलों से कम बरसते पानी ने किसानों के माथे की लकीरों को गहरा कर दिया है। खेतों में दरारे पड़ने से धान की बुवाई को लेकर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि यह अच्छा संकेत नहीं है। जिनके खेतों के आसपास सिंचाईं के साधन हैं, वहां तो ठीक है, लेकिन अन्य जगह स्थिति ठीक नहीं है। अगर बारिश और देरी से आती है तो धान की खेती के लिए हालात और बुरे हो जाएंगे।
दरअसल, बिपरजॉय तूफान आने के बाद से लेट हुआ मानसून ने किसानों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। उस पर कम बारिश और परेशानी का कारण बन गई है। जिले का पेंड्रा और मरवाही इलाके में खेतों की बुवाई अब तक नहीं हो पाई है। किसान जुताई के बाद अब बारिश का इंतजार कर रहा है। जिससे वह खेतों में रोपा लगा सके। आमतौर पर इन दिनों में धान के खेत पानी से लबालब भरे होते हैं, पर कम बारिश ने अब उनमें दरारें बना दी हैं। हालांकि किसानों को अभी उम्मीद है कि आने वाले समय में अच्छी बारिश होगी।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष अब तक जिले में करीब 512मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जबकि इस वर्ष 310 मिमी ही पानी बरसा है। पिछले वर्ष के मुकाबले 195 मिमी (38 प्रतिशत) कम बारिश रिकार्ड की गई। कृषि विभाग ने इस वर्ष 51700 हेक्टेयर में धान की फसल का लक्ष्य निर्धारित किया था। कम बारिश की वजह से करीब 16000 हेक्टेयर में धान की बुवाई बाकी है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को कम दिनों में तैयार होने वाली धान की फसल लगाने का सुझाव दिया है, पर इसके लिए उनके पास ऐसे बीज ही उपलब्ध नहीं हैं।