जानें क्या बोले स्थानीय लोग
एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि गणतंत्र दिवस 2026 बहुत जोश के साथ मनाया गया। गोगुंडा गांव में एक नया कैंप स्थापित किया गया है, जिसमें सीआरपीएफ और गांव पंचायत के सदस्य मौजूद थे। इस मौके पर लोगों ने नारे लगाए। वहीं सीआरपीएफ कैंप ने मिठाइयां बांटी हैं। यहां के लोग बहुत खुश हैं। यहां पहली बार इस तरह से मनाया गया है।
बस्तर संभाग में शांति की ओर बढ़ते कदम
बीते दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों की समन्वित नीतियों, सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई और स्थानीय समुदायों के सहयोग से बस्तर संभाग में शांति और सामान्य स्थिति की ओर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना ने इन गांवों में प्रशासन और सुरक्षा की उपस्थिति को मजबूत किया है। इसी का परिणाम है कि जहां पिछले वर्ष 53 गांवों में गणतंत्र दिवस मनाया गया था, वहीं इस वर्ष 47 नए गांवों में पहली बार यह राष्ट्रीय पर्व धूमधाम से आयोजित हुआ।
नए गांवों में मना गणतंत्र दिवस 2026 उत्सव
बीजापुर जिले के पुजारीकांकेर, गुंजेपर्ती, भीमाराम, कस्तुरीपाड, ताड़पाला हिल्स, उलूर, चिल्लामरका, काड़पर्ती, पिल्लूर, डोडीमरका, संगमेटा, तोडका, कुप्पागुड़ा, गौतपल्ली, पल्लेवाया और बेलनार जैसे गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया। इसी प्रकार, नारायणपुर जिले के एडजूम, इदवाया, आदेर, कुडमेल, कोंगे, सितराम, तोके, जटलूर, धोबे, डोडीमार्का, पदमेटा, लंका, परीयादी, काकुर, बालेबेडा, कोडेनार, कोडनार, अदिंगपार, मांदोडा, जटवार तथा वाडापेंदा गांव भी इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बने। सुकमा जिले के गोगुंडा, नागाराम, बंजलवाही, वीरागंगरेल, तुमालभट्टी, माहेता, पेददाबोडकेल, उरसांगल, गुंडराजगुंडेम तथा पालीगुड़ा में भी पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन हुआ।
ऐतिहासिक बदलाव और विकास की ओर अग्रसर
यह बदलाव उन दूरस्थ क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण सामान्य जीवन और लोकतांत्रिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित थीं। बस्तर क्षेत्र में अब 100 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। इन कैंपों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि विकास कार्यों के लिए भी मार्ग प्रशस्त किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने के प्रयास तेज हो गए हैं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर में शांति और विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है।