छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत पहले ही दिन एक अनोखे और चर्चा का विषय बने घटनाक्रम के साथ हुई। नवा रायपुर स्थित नए विधानसभा भवन में चल रही कार्यवाही के दौरान उस वक्त कुछ देर के लिए माहौल बदल गया, जब सदन के भीतर अचानक बिल्ली की आवाज सुनाई देने लगी। यह वाकया उस समय हुआ, जब वित्त मंत्री ओपी चौधरी सदन में 'छत्तीसगढ़ विजन 2047' पर अपना वक्तव्य रख रहे थे।
कार्यवाही के बीच सत्ता पक्ष की दीर्घा के ऊपर से आती आवाज ने पहले तो सदन में मौजूद सदस्यों को असमंजस में डाल दिया। कुछ विधायकों को लगा कि कहीं किसी का मोबाइल बज रहा है, लेकिन बार-बार आती आवाज ने सभी का ध्यान खींच लिया। स्पीकर से लेकर मंत्री और विधायक तक छत की ओर देखने लगे। बीच-बीच में बिल्ली की आवाज गूंजने से सदन में हल्की-फुल्की मुस्कान भी देखने को मिली। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी इस अप्रत्याशित स्थिति पर मुस्कुराते हुए माहौल को सहज बना दिया। माना जा रहा है कि बिल्ली भटकते हुए परिसर में दाखिल हो गई थी।
नए भवन में पहला सत्र, विपक्ष का बहिष्कार
रविवार से शुरू हुआ यह शीतकालीन सत्र कई कारणों से खास है। यह नवा रायपुर में बने नए विधानसभा भवन में आयोजित होने वाला पहला सत्र है और इसे पूरी तरह पेपरलेस बनाया गया है। हालांकि पहले ही दिन कांग्रेस ने सत्र का बहिष्कार कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष की स्थिति कमजोर हो चुकी है और जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही है।
विजन 2047 का खाका सदन के सामने
वित्त मंत्री ने ‘विजन 2047’ पर चर्चा करते हुए बताया कि यह दस्तावेज केवल सरकार की सोच नहीं, बल्कि जनभागीदारी से तैयार किया गया रोडमैप है। इसे तैयार करने में प्रदेशभर से लगभग एक लाख लोगों के सुझाव शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत युवा आबादी वाला देश है और आने वाले वर्षों में यही ताकत देश को आगे ले जाएगी। वित्त मंत्री के अनुसार भारत आज दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और वर्ष 2047 तक देश की अर्थव्यवस्था के 64 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसका सीधा लाभ राज्यों और आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।