छत्तीसगढ़ में नियमित-अनियमित कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन अब संयुक्त रूप से आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। 11 सितंबर को भोजनावकाश के दौरान इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 के सामने संयुक्त प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल होंगे।
प्रदर्शन के जरिए सरकार से महंगाई भत्ता, नियमितीकरण, पुरानी पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं समेत पांच प्रमुख मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से बातचीत के बावजूद उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकला है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया ने बताया कि करीब दो साल पहले शुरू किए गए ‘एक मांग-एक मंच’ अभियान को अब विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके आर्थिक लाभ समय पर नहीं मिल रहे हैं। अटेरिया के मुताबिक, केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता देने की मांग पहले भी सरकार के सामने रखी जा चुकी है। इसके अलावा लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स के भुगतान की मांग भी की जा रही है।
अनियमित कर्मचारी नेता गोपाल प्रसाद साहू ने नियमितीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली और न्यूनतम वेतन सहित कई मांगों को लेकर सरकार से पहल की मांग की। उन्होंने आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था का विरोध करते हुए स्वास्थ्य विभाग में इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग भी उठाई है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और वित्त सचिव से चर्चा के बाद भी मांगों पर अपेक्षित समाधान नहीं निकला। इसके बाद संयुक्त प्रदर्शन का निर्णय लिया गया।
ये पांच प्रमुख मांगें
- अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण और निकाले गए कर्मचारियों की बहाली।
- नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करना।
- स्वास्थ्य विभाग में ठेका व्यवस्था समाप्त करना।
- कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 20 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा।
- जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता और लंबित 86 महीने के डीए एरियर्स का भुगतान।
संगठनों ने कहा है कि 11 सितंबर का प्रदर्शन सरकार का ध्यान लंबित मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है। सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने को लेकर भी निर्णय लिया जा सकता है।