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दुर्ग: महिला अधिवक्ता की मौत मामले में कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

Sun, 08 Nov 2026 03:50 PM IST
अमन कोशले न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुर्ग-भिलाई

सार

महिला अधिवक्ता की इलाज के दौरान हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों और जिला अधिवक्ता संघ ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद कलेक्टर ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुर्ग जिले के स्मृति नगर स्थित हाईटेक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में महिला अधिवक्ता बलबीर कौर (चौहान) की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने मामले की पड़ताल के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। महिला अधिवक्ता की मृत्यु 1 नवंबर को अस्पताल में उपचार के दौरान हो गई थी।

 

कलेक्टर की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अपर कलेक्टर वीरेंद्र सिंह को जांच समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी, जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता सिन्हा और जिला अस्पताल की जनरल सर्जन डॉ. सरिता मिंज को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह समिति अस्पताल में मरीज के प्रवेश से लेकर इलाज तक की पूरी प्रक्रिया की गहनता से जांच करेगी और अपने सुझावों के साथ रिपोर्ट सौंपेगी।

 

महिला अधिवक्ता के निधन के पश्चात परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने और मरीज के स्वास्थ्य की सही जानकारी न देने के गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना से आक्रोशित होकर दुर्ग जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में वकीलों ने अस्पताल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों ने अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई करने, पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने तथा जिम्मेदार डॉक्टरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की पुरजोर मांग उठाई है।

 

दूसरी तरफ, हाईटेक अस्पताल के निदेशक डॉ. नवील शर्मा ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही के आरोपों का खंडन किया है। उनके अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ने तत्काल प्रक्रिया रुकवा दी। डॉक्टरों को फेफड़ों की खून की नस में थक्का जमने (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) की आशंका थी। मरीज को बचाने के लिए सीपीआर, आवश्यक दवाएं और आईसीयू में विशेषज्ञों द्वारा उपचार दिया गया, किंतु सफलता नहीं मिल सकी।

 

इधर, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने बताया कि संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। संघ चाहता है कि जांच प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी हो ताकि मौत का वास्तविक कारण सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।

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