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CG: पद्म विभूषण तीजन बाई को अंतिम विदाई, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस; कई जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

Sun, 05 Jul 2026 08:04 AM IST
दुर्ग-भिलाई ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, दुर्ग

सार

दुर्ग जिले की निवासी तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायन शैली, दमदार प्रस्तुति और सशक्त अभिनय के माध्यम से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों दर्शकों का दिल जीता। प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में प्रदेश के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
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पद्म विभूषण तीजन बाई को अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का रविवार सुबह 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 

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प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में प्रदेश के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि शामिल हुए। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, दुर्ग सांसद विजय बघेल, विधायक अनुज शर्मा, ललित चंद्राकर और डोमन लाल कोर्सेवाडा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर अंतिम विदाई दी। इस दौरान बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक, स्थानीय लोग और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

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दुर्ग जिले की निवासी तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायन शैली, दमदार प्रस्तुति और सशक्त अभिनय के माध्यम से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों दर्शकों का दिल जीता।

तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाएं सुनने और गाने का शौक था। सामाजिक विरोध और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को नहीं छोड़ा। महिलाओं के लिए उस दौर में पंडवानी की 'कापालिक शैली' में प्रस्तुति देना वर्जित माना जाता था, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई। तीजन बाई ने 13 साल की उम्र में सबसे चंद्रखुरी में अपनी प्रस्तुति दी।

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तीजन बाई ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला का डंका बजाया। उनकी कला की सराहना देश-विदेश में हुई। तीजन बाई को कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें प्रमुख हैं- पद्मश्री (1988) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995) पद्मभूषण (2003), पद्म विभूषण (2019)।

तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक थीं। उन्होंने अपने जीवन के छह दशक लोककला को समर्पित किए और नई पीढ़ी को पंडवानी की समृद्ध परंपरा से जोड़ा।

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