अमलेश्वर थाना पुलिस ने एक बड़े जमीन रजिस्ट्री फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामले में आज सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। न्यायालय के आदेश पर हुई इस कार्रवाई में पुलिस अब गहन जांच में जुटी है। यह मामला ग्राम झींट निवासी रामानंद पटेल की कृषि भूमि को कथित तौर पर साजिश रचकर अवैध तरीके से बेच दिए जाने से जुड़ा है। एक अप्रैल को न्यायालय ने आदेश जारी किया था और कल देर शाम पुलिस ने मामला दर्ज किया।
प्रार्थी रामानंद पटेल ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाटन की अदालत में एक आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि उसकी कृषि भूमि को धोखे से बेच दिया गया है। पटेल के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2015 में दौवाराम पटेल से पैसे उधार लिए थे, जिसके एवज में उन्होंने अपनी जमीन का पावर ऑफ अटॉर्नी दौवाराम पटेल को दिया था। यह पावर ऑफ अटॉर्नी 10 अगस्त 2017 को विधिवत रूप से निरस्त कर दिया गया था।
आरोप है कि पावर ऑफ अटॉर्नी निरस्त होने के बावजूद, आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से उसी रद्द पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री करा ली। प्रकरण में यह बात भी सामने आई है कि जिस समय प्रार्थी जेल में था, उस दौरान कथित तौर पर एक अधिवक्ता और अन्य आरोपियों ने मिलकर साजिश रची और जमीन का सौदा कर लिया।
मामले में प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर, न्यायालय ने अमलेश्वर पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए। इन निर्देशों के अनुपालन में, अमलेश्वर पुलिस ने दौवाराम पटेल, लता बाई पटेल, कमल किशोर पटेल, कल्याण दास बघेल, मानसिंह साहू, आशुतोष शुक्ला (अधिवक्ता) और अशोक खटवानी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब इस मामले की तह तक जाने के लिए जुटाी है। जांच के दायरे में यह पता लगाया जाएगा कि किस प्रकार निरस्त पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर रजिस्ट्री संभव हुई और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता थी। अधिवक्ता की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि आरोप है कि उन्होंने भी इस साजिश में अपनी भूमिका निभाई। पुलिस सभी आवश्यक साक्ष्यों को जुटाने और आरोपियों से पूछताछ करने की प्रक्रिया में है।