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डीएमएफ घोटाला: ईडी ने 31.70 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की, बघेल सरकार का मामला

Sun, 01 Nov 2026 07:56 AM IST
अमन कोशले न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर

सार

डीएमएफ घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। जांच एजेंसी ने सतपाल सिंह छाबड़ा, मंदीप चावला समेत 17 आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के चर्चित जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोष घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 31.70 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत यह कुर्की आदेश जारी किया था। इसके तुरंत बाद जांच एजेंसी ने रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत भी दायर कर दी। यह मामला राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासनकाल के दौरान हुए कथित वित्तीय घोटाले से संबंध रखता है।
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सत्र अदालत में पूरक याचिका दाखिल
जांच एजेंसी ने विशेष अदालत के समक्ष दायर की गई अपनी इस पूरक अभियोजन शिकायत में सतपाल सिंह छाबड़ा और मंदीप चावला सहित 15 अन्य लोगों को नामजद किया है। इस प्रकार एजेंसी ने कुल 17 आरोपियों के खिलाफ अदालत में औपचारिक शिकायत पेश की है। ईडी ने राज्य के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो तथा राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) रायपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई प्राथमिकियों के आधार पर अपनी धन शोधन जांच की शुरुआत की थी। इसके उपरांत छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कांकेर जिले में दर्ज प्राथमिकी तथा एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज अन्य प्राथमिकी को भी इसी जांच के दायरे में शामिल किया गया।

खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों और वहां निवास करने वाले समुदायों के समग्र कल्याण एवं आधारभूत विकास के लिए डीएमएफ फंड की स्थापना की गई थी। हालांकि ईडी की पड़ताल से पता चला है कि सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, एजेंटों और बिचौलियों के एक संगठित सिंडिकेट ने इस जन कल्याणकारी फंड का आवंटन तथा उपयोग अपने निजी स्वार्थ के लिए किया और राशि को हड़प लिया।
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पचास प्रतिशत तक अवैध कमीशन वसूला
इस संगठित सिंडिकेट ने डीएमएफ फंड से होने वाले कार्यों के आवंटन और पूरी व्यवस्था में भारी हेरफेर की। सिंडिकेट के सदस्यों ने योजनाबद्ध तरीके से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता प्रदान की, जिनमें वस्तुओं और सेवाओं की खरीद लागत को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया था। लागत बढ़ाकर दिखाने के पीछे मुख्य मंशा आपूर्तिकर्ताओं से अवैध कमीशन प्राप्त करना था।

जांच एजेंसी के अनुसार, एजेंटों और बिचौलियों ने 'रेट कॉन्ट्रैक्ट' हासिल करने वाली विभिन्न कंपनियों को जारी किए गए परचेज ऑर्डर की कुल कीमत का 25 से लेकर 50 प्रतिशत तक का भारी कमीशन वसूला। इस वसूले गए कमीशन का एक बहुत बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को घूस के रूप में पहुंचाया गया। इसके बदले में संबंधित अधिकारियों ने चुनिंदा वेंडरों को डीएमएफ से संबंधित काम आवंटित किए, परचेज ऑर्डर जारी किए और भुगतानों को तुरंत स्वीकृत करवाया।

बीज निगम की खरीद में धांधली
यह पूरा अवैध कमीशन नकद धनराशि और बैंकिंग चैनलों दोनों माध्यमों के जरिये वसूला जाता था। इसके पश्चात अवैध कमाई के वास्तविक स्रोत को छिपाने के उद्देश्य से इस धन को कई अलग-अलग संस्थाओं और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया कि एजेंटों ने 'छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम' (बीज निगम) के माध्यम से की गई सरकारी खरीद के मामलों में भी इसी प्रकार से अवैध कमीशन वसूला था। इन खरीद मामलों में डीएमएफ के अलावा सरकार के अन्य फंडों का इस्तेमाल भी किया गया था।

सतपाल सिंडिकेट का समन्वयक
ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा की पहचान इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य संपर्ककर्ता और प्रमुख वित्तीय समन्वयक के रूप में की है। उस पर आरोप है कि उसने पसंदीदा वेंडरों को आपूर्ति से संबंधित कार्य दिलाने, परचेज ऑर्डर जारी कराने, भुगतानों को स्वीकृत कराने तथा अवैध कमीशन वसूलने और उसे वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी ने आरोपी को 1 सितंबर को गिरफ्तार किया है।
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