मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान के सीधे हस्तक्षेप के बाद जिला पंचायत में चल रहा सियासी घमासान थम गया। जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह अपने पद पर बनी रहेंगी। पार्टी के छह जिला पंचायत सदस्यों ने कांग्रेस सदस्य के साथ मिलकर अध्यक्ष को पद से हटाने की साजिश रची थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के कड़े रुख और मध्यस्थता के बाद बागियों का अविश्वास प्रस्ताव का प्रयास विफल हो गया।
अविश्वास प्रस्ताव और बगावत की साजिश
जिला भाजपा के महामंत्री और जिला पंचायत सदस्य नरसिंग भंडारी तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष भोजेश शाह मंडावी की अगुआई में कलेक्ट्रेट में अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन दिया गया था। इस आवेदन पर लखन कलामे, सविता शोरी, रेखा कोठारी, शांति त्रिपुरे और कांग्रेस सदस्य शेषवरी धुर्वे के हस्ताक्षर थे। 10 सदस्यीय जिला पंचायत में अध्यक्ष नम्रता सिंह को पद से हटाने के लिए यह व्यूहरचना रची गई थी। आवेदन देने के बाद बागी सदस्य अचानक जिले से लापता हो गए थे। बागी सदस्यों में शामिल सविता शोरी, रेखा कोठारी और शांति त्रिपुरे चुनाव से ठीक पहले भाजपा में आए थे।
शीर्ष नेतृत्व का कड़ा रुख
मामला तूल पकड़ते ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बागी सदस्यों को रायपुर तलब किया। रायपुर में वरिष्ठ नेताओं ने बागियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नम्रता सिंह को हटाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद शु मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं के कड़े रुख के साथ ही बागी सदस्यों के बीच आपस में फूट पड़ गई।
बढ़ती लोकप्रियता से उपजा राजनीतिक द्वेष
कांग्रेस के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में नम्रता सिंह की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव के कारण ही पार्टी के कुछ नेताओं में असंतोष पनप रहा था। रायपुर में बातचीत के दौरान बागी सदस्यों ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष खुलकर अपनी खुन्नस प्रकट की। उन्होंने शिकायत की कि पार्टी नम्रता सिंह को ही जिले में शीर्ष स्थान देती है। इसी वजह से नम्रता सिंह को राजनीतिक मुश्किलों में डालने की योजना बनाई गई थी।