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छत्तीसगढ़: नीट यूजी काउंसलिंग की 87 सीटों पर विवाद, अभ्यर्थी पहुंचे हाईकोर्ट

Sun, 25 Oct 2026 08:40 PM IST
अमन कोशले न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर

सार

दावा है कि इनमें से केवल 4 सीटें राज्य के विद्यार्थियों को मिलीं, जबकि 83 सीटें बाहरी अभ्यर्थियों को आवंटित हुईं। सीटों के संवर्ग परिवर्तन और पात्रता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप तथा प्रमाणपत्रों की जांच की मांग की है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ में नीट यूजी काउंसिलिंग के चौथे चरण में एमबीबीएस की 87 सीटों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के विद्यार्थियों और पालकों ने पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि आवंटित 87 सीटों में से छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों को केवल चार सीटें ही मिली हैं। वहीं, 83 सीटों पर बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया है।
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इस स्थिति से असंतोष जताते हुए पालकों ने सीट आवंटन की प्रक्रिया, सीटों के संवर्ग में किए गए बदलावों और चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता की स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि, बाहरी अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी दस्तावेज के प्रयोग से जुड़े इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

राजपत्र के नियमों और संवर्ग परिवर्तन पर उठे सवाल
विवाद की मुख्य वजह छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 14 जुलाई, 2025 को जारी राजपत्र का नियम 8(1) बना हुआ है। पालकों का तर्क है कि राजपत्र के नियम 8(1) में आरक्षित सीटों के संवर्ग और श्रेणी में बदलाव करने के लिए एक तय प्रक्रिया बताई गई है। पालकों का आरोप है कि कुछ सीटों का संवर्ग परिवर्तन उस चरण में करने के बजाय उससे पहले के चरण में ही कर दिया गया, जबकि इसके लिए नियम में अलग चरण निर्धारित था।
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इसके अतिरिक्त, निजी मेडिकल कॉलेजों की प्रबंधन नियतांश और एनआरआई कोटे की रिक्त सीटों को दूसरे संवर्ग में समायोजित करने के तरीकों पर भी सवाल उठाए गए हैं। पालकों की मांग है कि काउंसिलिंग के हर चरण में कुल उपलब्ध सीटों तथा शेष बची सीटों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। साथ ही सीटों के संवर्ग परिवर्तन से जुड़े सभी प्रशासनिक आदेश और अंतिम सीट आवंटन की स्थिति को पारदर्शी रूप से लोगों के सामने रखा जाए। 

अभ्यर्थियों की संख्या में वृद्धि और दस्तावेज की जांच
काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों के आंकड़ों में अचानक हुई वृद्धि ने पालकों के संदेह को और बढ़ा दिया है। पालकों का दावा है कि प्रक्रिया के बीच में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या में यकायक बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार, लगभग 350 नए अनुसूचित जाति और 750 नए अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी अचानक काउंसलिंग में शामिल हो गए। इसके साथ ही राज्य के स्थानीय निवासी अभ्यर्थियों की संख्या में भी करीब 1,000 की वृद्धि देखी गई है।

इसी आधार पर पालकों ने काउंसलिंग में शामिल हुए सभी नए अभ्यर्थियों के जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास प्रमाणपत्र और अन्य शैक्षणिक पात्रता दस्तावेज की गहन जांच कराने की मांग की है। पालकों ने आरोप लगाया है कि बाहरी राज्यों के कुछ अभ्यर्थियों ने कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर राज्य कोटे का लाभ उठाया है। वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सभी आवेदन पत्रों, निवास एवं जाति प्रमाणपत्रों तथा काउंसलिंग के रिकॉर्ड का सत्यापन कराना अनिवार्य माना जा रहा है।

हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग और आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम से असंतुष्ट होकर विद्यार्थियों और उनके पालकों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने अदालत से 87 एमबीबीएस सीटों के आवंटन, नियम 8(1) के क्रियान्वयन, सीटों के संवर्ग में हुए परिवर्तनों और चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता की स्वतंत्र समीक्षा कराने की गुहार लगाई है।

पालकों की मांग है कि यदि जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता उजागर होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। पालकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो वे पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल 87 सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा की काउंसिलिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और राज्य के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
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