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Dhamtari: पीएम सूर्यघर योजना के तहत जिले की हेमलता ने बिजली का बिल किया शून्य, आप भी ऐसे उठा सकते हैं लाभ

Mon, 11 Aug 2025 09:20 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी

सार

योजना की लाभार्थी हेमलता ने बताया कि उनका मासिक बिजली बिल 1500 से 2000 रुपये तक आता था, लेकिन अब उनका बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, संयंत्र से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड में भी भेजी जा रही है।
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योजना की लाभार्थी हेमलता साहू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऊर्जा संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना धमतरी जिले के नागरिकों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। इस योजना ने न केवल लोगों को महंगे बिजली बिल से मुक्ति दिलाई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दानिटोला वार्ड की निवासी हेमलता साहू इसका जीवंत उदाहरण हैं। 

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हेमलता साहू ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल संयंत्र स्थापित किया है। लगभग 2 लाख रुपये लागत वाले इस संयंत्र के लिए उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग के कारण उन्हें प्रारंभिक निवेश में काफी राहत मिली।

हेमलता ने बताया कि सोलर पैनल लगाने से पहले उनका मासिक बिजली बिल 1500 से 2000 रुपये तक आता था, लेकिन अब उनका बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, संयंत्र से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड में भी भेजी जा रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय की संभावना बनी हुई है।
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उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत बैंक से कम ब्याज दर (7 प्रतिशत) पर ऋण भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे आम उपभोक्ता भी बिना वित्तीय बोझ के सौर संयंत्र लगा सकता है।

पंजीयन प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन-

- उपभोक्ता को pmsuryaghar.gov.in या PMSuryaGhar मोबाइल एप पर रजिस्ट्रेशन करना होता है।
- वेब पोर्टल से पंजीकृत वेंडर का चयन किया जाता है।
- संयंत्र की स्थापना और सत्यापन के बाद सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में भेज दी जाती है।

इस पहल ने न केवल घरों को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाई है। सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उत्पादन जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण में कमी आती है।

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