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धमतरी: मछलीपालन विभाग की योजनाओं की धीमी रफ्तार, सहायक संचालक को कलेक्टर का नोटिस

Sun, 18 Oct 2026 05:40 PM IST
धमतरी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी

सार

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने सहायक संचालक, मछलीपालन एम.एस. कमल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें नोटिस प्राप्ति के तीन दिवस के भीतर सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सहायक संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धमतरी जिले में मछलीपालन विभाग की योजनाओं की प्रगति असंतोषजनक पाए जाने पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने सहायक संचालक मछलीपालन एम.एस. कमल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारी को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर तथ्यात्मक जानकारी और संबंधित अभिलेखों के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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कई योजनाओं में लक्ष्य से पीछे विभाग
जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर को कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक के लिए तैयार विभागीय प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन किया गया। इसमें कई महत्वपूर्ण योजनाओं की उपलब्धि निर्धारित लक्ष्य से कम पाई गई। इसके बाद कलेक्टर ने योजनाओं के क्रियान्वयन और लक्ष्यपूर्ति को लेकर नाराजगी जताई।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के लिए 37,993.54 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि अब तक 21,277.37 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। इसी तरह मत्स्य कृषक प्रशिक्षण के 573 हितग्राहियों के लक्ष्य के विरुद्ध 395 हितग्राहियों को ही प्रशिक्षण दिया गया है।
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झींगा पालन सहायता योजना में शून्य उपलब्धि
नोटिस में मत्स्य अंगुलिकाओं के संचयन में 700 इकाई के लक्ष्य के मुकाबले 450 इकाई की उपलब्धि का उल्लेख किया गया है। वहीं, झींगा पालन सहायता योजना में 50 इकाई के लक्ष्य के विरुद्ध कोई उपलब्धि दर्ज नहीं हुई। मत्स्य कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से लाभान्वित करने के लिए 8,500 का लक्ष्य निर्धारित था। इसके मुकाबले 1,053 प्रकरण प्रस्तुत किए गए और 516 प्रकरण स्वीकृत हुए। इसके अलावा फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के तहत एक्वा इंश्योरेंस और अधोसंरचना निर्माण से जुड़े प्रकरणों में भी शून्य उपलब्धि पाई गई।

तीन दिन में जवाब देने के निर्देश
कलेक्टर ने योजनाओं की नियमित समीक्षा, निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति और पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। नोटिस में इसे प्रथम दृष्टया पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और उदासीनता का मामला मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन के संबंध में विचारणीय बताया गया है।

निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्च कार्यालय को पत्र भेजने की चेतावनी दी गई है। अब अधिकारी के जवाब और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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