छत्तीसगढ़ सरकार ने भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए समितियों का गठन किया है।
राज्य सरकार ने लोकायुक्त की सिफारिश के बाद इन जांच समितियों का गठन किया है।
इन समितियों में मुख्य कार्यपालक अभियंता, जनपद एवं जिला पंचायत, संयुक्त निदेशक, अतिरिक्त कलेक्टर, कार्यकारी अभियंता, अधीक्षक अभियंता तथा मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
महालेखा परीक्षक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के जरिए जांच कराने की अनुशंसा के बाद प्रशासनिक अधिकारी द्वारा जांच कराने से लोकायुक्त की स्थापना का मकसद निर्थक साबित हो रहा है।
उल्ल्खनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना के बाद यह रिपोर्ट सामने आई है।
इसमें दिसंबर, 2008 से जून, 2013 के बीच दस्तावेज हैं। महालेखा परीक्षक कार्यालय के अधिकारियों द्वारा 2 से 6 अगस्त के बीच ऑडिट किया गया।
छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम-2002 में कहा गया है कि अगर नौकरशाहों के खिलाफ शिकायत अथवा कोई विशेष सूचना मिलती है तो इसकी जांच के लिए किसी अधिकारी अथवा अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।