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ऑनलाइन परीक्षा केंद्र का झांसा: फर्जी कंपनी और मीटिंग का पूरा खेल,कॉलेज से 12.39 लाख ऐंठकर ठगों ने बंद किए फोन

Mon, 14 Sep 2026 04:07 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, दुर्ग-भिलाई

सार

निजी कॉलेज को ऑनलाइन परीक्षा केंद्र दिलाने का सपना दिखाकर ठगों ने पहले फर्जी प्रस्ताव भेजा, फिर साइट विजिट और ऑनलाइन मीटिंग तक कराई। भरोसा जीतने के बाद उपकरण, DG सेट, परिवहन और बीमा के नाम पर किस्तों में 12.39 लाख रुपये वसूल लिए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुर्ग जिले में ऑनलाइन परीक्षा केंद्र शुरू कराने का झांसा देकर शातिर ठगों ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले स्थित निजी महाविद्यालय से करीब 12.39 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को एचसीएल टेक्नोलॉजीज के परीक्षा केंद्र विभाग से जुड़ा बताकर संस्थान को अपने जाल में फंसाया। लगातार भुगतान लेने के बाद जब ठगों के फोन बंद हो गए, तब कॉलेज प्रबंधन को ठगी का अहसास हुआ। संस्थान के अध्यक्ष की शिकायत पर नेवई पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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फर्जी प्रस्ताव और भौतिक मुआयना
अंडा स्थित शैल देवी महाविद्यालय के आधिकारिक ई-मेल पर ठगों ने 12 अप्रैल, 2025 को एक प्रस्ताव भेजा। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा केंद्र स्थापित करने की बात लिखी थी। पत्र में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का संपर्क नंबर दर्ज था। इसके बाद ठगों ने 17 अप्रैल को ई-मेल से समझौता पत्र भेजा। ठगों ने 18 अप्रैल को बुल आई नामक संस्था के प्रतिनिधि एके साहू को भौतिक मुआयने के लिए कॉलेज भेजा। उसने कॉलेज भवन तथा परिसर की तस्वीरें लीं और निरीक्षण रिपोर्ट भेजने का आश्वासन देकर चला गया।

ऑनलाइन बैठक और पहला भुगतान
इसके बाद 1 मई को दोपहर ठगों ने ऑनलाइन बैठक रखी। इसमें कॉलेज के अध्यक्ष राजन कुमार दुबे और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा शामिल हुए। बैठक में कंपनी की प्रतिनिधि अनीता नाम की महिला ने बातचीत की। ठगों ने 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी के दस्तावेज भेजे, जिन पर कॉलेज प्रबंधन ने 8 मई को हस्ताक्षर करके वापस भेज दिया। ठगों ने 19 मई को परीक्षा उपकरणों के नाम पर 5,98,743 रुपये का बिल भेजा। कॉलेज ने 21 मई को इस राशि का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से कर दिया।
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विभिन्न मदों में रकम वसूली
उपकरणों के भुगतान के बाद ठगों ने 23 मई को डीजी सेट के नाम पर 3,42,200 रुपये मांगे, जिसे कॉलेज ने 26 मई को जमा कर दिया। फिर ठगों ने 11 जून को सामान के परिवहन के लिए 1,35,700 रुपये और बीमा के लिए 1,62,840 रुपये की मांग रखी। कॉलेज प्रबंधन ने 13 जून को 2,98,540 रुपये की यह रकम भी स्थानांतरित कर दी। इस प्रकार अलग-अलग किस्तों में कुल 12,39,483 रुपये ले लिए गए। 15 जून के बाद ठगों के फोन बंद हो गए। अब पुलिस ई-मेल, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है।
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