बीजापुर जिले के एड़समेटा गांव में हुई मुठभेड़ की न्यायिक जांच होगी। जस्टिस वीके अग्रवाल इसकी न्यायिक जांच करेंगे।
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने रविवार को वरिष्ठ अफसरों के साथ घटना की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया।
साथ ही सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है।
रमन सिंह ने अपने निवास पर बैठक कर चर्चा की, जिसमें यह बात सामने आई की मुठभेड़ में सीआरपीएफ के जवानों ने लड़ाई लड़ी। साथ ही नक्सलियों की फायरिंग में एक जवान शहीद हुआ है।
इसलिए फैसला हुआ कि मामले की न्यायिक जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।
उल्लेखनीय है कि जवानों को एड़समेटा गांव में नक्सलियों की बैठक होने की सूचना मिली थी। जवानों ने शुक्रवार रात करीब 12 बजे गांव में गोलीबारी कर दी। इसमें आठ ग्रामीणों के जान चली गई।
वहीं, ग्रामीणों ने नक्सलियों के होने से इंकार किया है। उनका कहना है कि मारे गए सभी लोगों में गांव वाले थे। वे स्थानीय पर्व मनान के लिए बैठक कर रहे थे।
कांग्रेस ने की सीबीआई जांच की मांग
एड़समेटा मुठभेड़ को लेकर कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही कांग्रेस ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए इसके लिए विधायक कवासी लखमा की अध्यक्षता में एक जांच समिति भी बनाई है।
कांग्रेस का कहना है कि 10 साल के मासूम गुड्डू कारम, 12 साल के बहादुर और 15 वर्षीय पुनेम लखमा की हत्या के बाद उन्हें नक्सली साबित करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस जांच कमिटी घटना स्थल का दौरा करेगी, मृतकों के परिजनों एवं स्थानीय ग्रामीणों से मिलकर अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेंगी।