बस्तर की लाइफलाइन कही जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग-30 की केशकाल शहर से गुजरने वाली सड़क इन दिनों बदहाली की चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। सड़क की दुर्दशा से परेशान नागरिकों और व्यापारियों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा।
बस्तर की लाइफलाइन कही जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग-30 की केशकाल शहर से गुजरने वाली सड़क इन दिनों बदहाली की चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। सड़क की दुर्दशा से परेशान नागरिकों और व्यापारियों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा। व्यापारी संघ और स्थानीय नागरिकों ने एक दिवसीय नगर बंद का आह्वान किया, जिसे नगर के सभी व्यापारियों ने पूर्ण समर्थन दिया। दोपहर एक बजे तक लगभग सभी दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर सड़क के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। उड़ती धूल और गहरे गड्ढों से आमजन को शारीरिक परेशानी और आर्थिक नुकसान दोनों उठाने पड़ रहे हैं। लोगों ने शासन-प्रशासन से सड़क निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की मांग की है। एनएच-30 के केशकाल शहर की 3.5 किलोमीटर सड़क के नवीनीकरण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग कोंडागांव द्वारा 8 करोड़ 19 लाख रुपये की लागत से निविदा आमंत्रित की गई थी। हालांकि अब तक किसी ठेकेदार ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। निविदा की तिथि कई बार बढ़ाई जा चुकी है और अब इसे 7 नवंबर को खोला जाना तय है।
व्यापारी संघ पदाधिकारियों ने बताया कि सड़क की खराब स्थिति से व्यापार पूरी तरह चौपट हो चुका है। धूल और कीचड़ के कारण लोग बाजार आने से बच रहे हैं। वहीं, स्थानीय नागरिकों ने बताया कि उड़ती धूल से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं और स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। लोगों ने कहा कि अब सब्र का बाँध टूट चुका है, और सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।