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रमन सिंह के राज में भूख से तड़प-तड़पकर बच्चे की मौत

Sun, 24 May 2015 03:31 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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चांउर (चावल) वाले बाबा के नाम से विख्यात रमन सिंह के राज्य छत्तीसगढ़ में भूख से मौत का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। राज्य के अंबिकापुर जिले के मैनपाट के सीतापुर के रहने वाले संगत राम अपने तीन बच्चों के साथ रोजी रोटी की तलाश में पंड़िया गांव के लिए निकले थे।
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चिलचिलाती गर्मी में वो अपने तीन बच्चों शिवकुमार (उम्र 4 वर्ष), श्रवण (उम्र 6 वर्ष) और राजा राम (उम्र 8 वर्ष) को साथ लेकर जा रहा था। पड़िया गांव जाने के लिए वे बस से उतरने के बाद 2 किलोमीटर पैदल जा रहे थे।

रास्ते में अंधेरा होने की वजह से संगतराम और राजाराम आगे निकल गएजबकि शिवकुमार और श्रवण पीछे छूट गए। दोनों छूटे हुए बच्चे अपने पिता को ढूंढ़ने के लिए पगडंडी के रास्ते से भूखे प्यासे भटक रहे थे। (फोटो में श्रवण)
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बेहोश हो गए दोनों बच्चे

दोनों बच्चे जंगल में अपने भाई और पिता को ढूंढ़ते हुए जंगल में पगडंडी के रास्ते लगातार 40 घंटे का सफर करते रहे। चिलचिलाती गर्मी में दोनों बच्चे डूमरपारा के पास एक पेड़ की छांव में आकर बैठ गए, जिसके बाद शिवकुमार अपने बड़े भाई श्रवण से खाना मांगने लगा, लेकिन श्रवण उसे खाना नहीं दिला सका।

भूख प्यास से बेचैन शिवकुमार लगातार अपने हाथ पांव जमीन पर पटक रहा था और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। अपने भाई की मौत के कुछ देर बाद ही श्रवण भी बेहोश हो गया। दोनों इसी हालात में पूरी रात सूनसान जंगल में पड़े रहे। ( फोटो स्थानीय अखबार की)

सूख गईं थी अंतड़िया

अगले दिन सुबह एक महिला की नजर इन बच्चों पर पड़ी।उसके बाद उसने पुलिस और स्वास्थ्य कार्यकर्ता रितेश गुप्ता को सूचना दी। जिसके बाद सीतापुर थाने से थाना प्रभारी सहित पुलिस बल मौके पर पहुंची।

बेहोश श्रवण को थाने लाकर खाना खिलाया गया। श्रवण बुखार से पीड़ित था, जिसकी देखभाल स्वास्थ्य कार्यकर्ता रितेश ने की।पुलिस ने शिवकुमार के शव का परीक्षण कराने के बाद उसका शव परिजनों को दे दिया।

शिवकुमार के शव परीक्षण के दौरान पाया गया की उसका पेट पूरी तरह से खाली था। उसकी अतड़िया सूख गई थी। शव परीक्षण अधिकारी डा0 शिवनारायण ने कहा कि परीक्षण के दौरान बच्चे का पेट पूरी तरह से खाली था। भीषण गर्मी और लू के दौरान उसने कुछ नहीं खाया था।

राशन कार्ड हो गया था निरस्त

टीआई सीतापुर विनोद अवस्थी के अनुसार मृत बच्चे के शरीर पर चोट के कहीं कोई निशान नहीं है। संभवतः बच्चे की मौत भूख और गर्मी से हुई है। उन्होंने बताया कि मृत बालक के भाई श्रवण का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया है और वो अभी स्वस्थ्य है।

संगतराम का परिवार दाने दाने को मोहताज था। संगतराम की बीमार पत्नी की मौत आर्थिक तंगी के कारण पहले ही हो चुकी थी। उसके पास गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड था जिस पर परिवार को 35 किलो चावल मिलता था।

लेकिन सत्यापन के दौरान वो कार्ड भी निरस्त कर दिया गया। जिस वजह से चावल मिलना भी बंद हो गया। आर्थिक तंगी और खाने के लिए घर में एक एक दाने के लिए तरसने के कारण संगतराम की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं बताई जा रही है।
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बड़ा बेटा अभी भी लापता

संगतराम का सबसे बड़ा बेटा राजाराम अभी तक लापता है, वहीं संगत राम अपने घर पहुंच चुका है। संगतराम के अनुसार दोनों छोटे बेटे एक साथ थे, जबकि राजा राम उसके साथ था, लेकिन वो कहीं और भटक गया।

संगतराम भी भटक कर फुलवारी जंगल पहुंच गया था। सूचना मिलने पर संगतराम का भाई शंकर आया और वो उसे घर लेकर गया। बड़े बेटे के अब तक लापता होने से परिवार के साथ साथ पुलिस भी बेचैन है।
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