छत्तीसगढ़ का लोकपर्व छेरछेरा धूमधाम के साथ मनाया मनाया जा रहा है। यह पर्व पौष पूर्णिमा के दिन खास तौर पर मनाया जाता है। यह अन्न दान का महापर्व है। छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आ जाने के बाद मनाया जाता है।
आज सुबह से ही बच्चे, युवक व युवतियां हाथ में टोकरी, बोरी आदि लेकर घर-घर छेरछेरा मांगते हैं। वहीं युवकों की टोलियां डंडा नृत्य कर घर-घर पहुंचती हैं। धान मिंसाई हो जाने के चलते गांव में घर-घर धान का भंडार होता है, जिसके चलते लोग छेर छेरा मांगने वालों को दान करते हैं। साथ ही शहरी अंचलों में भी छेरछेरा की धूम रही।
शहर के सीतामणी, बुधवारी, काशी नगर, संजय नगर शारदा विहार इलाके में बच्चों की टोली छेरछेरा मानते नजर आए। जहां काफी संख्या में बच्चे और बड़े लोग नजर आए। इसके अलावा एक बच्चों की टोली बालको थाना पहुंची। जहां बच्चे हाथ में ड्रम बाजा लेकर बजाते हुए पहुंचे और छेरछेरा मांगने लगे। आवाज सुनकर थाना प्रभारी नितिन उपाध्याय ने बच्चों के साथ रंग में ढल गए और खुशी जाहिर करते हुए बच्चों की टोली को छेरछेरा दान किया।
वहीं बच्चों की उज्जवल भविष्य की कामना भी की। दर्री थाना में भी बच्चों की एक टोली पहुंची। जहां थाना प्रभारी रूपक शर्मा ने बच्चों को चॉकलेट देकर छेरछेरा मनाया गया। मानिकपुर चौकी प्रभारी प्रेम साहू ने भी अलग अंदाज में छेरछेरा मनाया। जहां थाना आने जाने वाले सभी को छेरछेरा का बधाई देते हुए लोगों यातयात की जानकारी दी गई।
वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहार में से एक त्योहार छेरर छेरा भाटापारा में धूमधाम से मनाया जा रहा है। भाटापारा के अलग-अलग वॉर्डों के छोटे छोटे बच्चों के द्वारा समूह बनाकर घरों में जाकर छेरर छेरा मांगा जा रहा है।