सिन्हा के अनुसार, अभय ई-मेल के जरिए कई पहचान छिपाकर रहने वाले माओवादी कैडरों, जैसे जेएनयू एल्युमनी रौना विल्सन और नागपुर विश्वविद्यालय की रिटायर्ड प्रोफेसर सोमा सेन से भी जुड़ा हुआ था। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की योजना वाला पत्र भी रौना विल्सन के ही लैपटॉप से रिकवर किया गया है। ऐसे में अभय के भी उस मामले से तार जुड़े हो सकते हैं।
भीमा-कोरेगांव हिंसा फैलाने वालों से जुड़ाव
सिन्हा ने बताया कि अभय देश और विदेश में सक्रिय वरिष्ठ माओवादी नेताओं के साथ संपर्क में था। साथ ही वह उन माओवादियों हितैषियों के भी संपर्क में था, जो भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किए हैं। उन्होंने बताया, अभय के बंगलूरू स्थित आवास की तलाशी के दौरान पुलिस ने जो लैपटॉप, कई पैन ड्राइव और एक हार्ड डिस्क, माओवादी साहित्य व कई डायरी बरामद की हैं, उनसे उसके वरिष्ठ माओवादी नेताओं से और हितैषियों से जुड़े होने की बात साबित होती है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा, माओवादी नेता गुदसा उसेंडी, विकल्प (दंडकारण्य स्पेशल जोन कमेटी प्रमुख), शशि पटनायक आदि से भी जुड़ा था।
दरभा में मिले बारूदी सुरंग से आया नाम सामने
पुलिस अधिकारी के अनुसार, अभय का नाम माओवादी प्रवक्ता के तौर पर पहली बार पिछले साल बस्तर के दरभा क्षेत्र में बारूदी सुरंग के पास मिले माओवादी साहित्य व पर्चों से सामने आया था। पहले वह आजाद के नाम से बयान जारी करता था। बाद में उसने अपना नाम अभय कर लिया था।