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Raipur News: डिजिटल सुशासन में छत्तीसगढ़ की नई पहचान, विद्या समीक्षा केंद्र बना राष्ट्रीय मॉडल

Sun, 18 Jan 2026 08:36 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ ने शिक्षा प्रशासन में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग के जरिए देश के सामने सुशासन की एक मजबूत मिसाल पेश की है।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ ने शिक्षा प्रशासन में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग के जरिए देश के सामने सुशासन की एक मजबूत मिसाल पेश की है। आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (IBITF) ने राज्य के विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) को शिक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की है। संस्था के अनुसार, यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूती प्रदान करती है।
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विद्या समीक्षा केंद्र छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित एक अभिनव डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत रूप देना है। यह केंद्र इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार डिजिटल नवाचार के माध्यम से शासन सुधार को प्राथमिकता दे रही है।

छत्तीसगढ़ देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन करता है, जहां 48,500 से अधिक शासकीय विद्यालय, लगभग 39 लाख विद्यार्थी और करीब 1.8 लाख शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी कार्यरत हैं। इतने बड़े तंत्र के प्रबंधन में पहले बिखरे हुए आंकड़े, रियल-टाइम निगरानी की कमी और निर्णयों में देरी जैसी चुनौतियां सामने आती थीं। विद्या समीक्षा केंद्र ने इन चुनौतियों का समाधान करते हुए एक केंद्रीकृत, रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इसके जरिए शिक्षा विभाग को समय पर सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे योजनाओं और नीतियों का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हुआ है।
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इस केंद्र के माध्यम से UDISE, HRMIS, पीएम पोषण, PGI, APAAR ID, आधार और जीआईएस मैपिंग जैसे प्रमुख डेटाबेस का एकीकृत उपयोग किया जा रहा है। इससे विद्यालयों की अधोसंरचना, शिक्षक तैनाती, छात्र उपस्थिति, सीखने के परिणाम और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सतत निगरानी संभव हो सकी है।

विद्या समीक्षा केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव मॉडल का भी उपयोग किया जा रहा है, जो संभावित ड्रॉपआउट और अधिगम अंतराल की समय रहते पहचान में मददगार साबित हो रहे हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और समान अवसरों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है।

डिजिटल पहल के ठोस परिणाम भी सामने आए हैं। राज्य में लगभग 87 प्रतिशत विद्यार्थियों के लिए APAAR ID तैयार की जा चुकी है, करीब 89 प्रतिशत आधार सत्यापन पूरा हो चुका है और 2.13 करोड़ से अधिक पाठ्यपुस्तकों की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से लगभग 50 करोड़ रुपये की बचत संभव हुई है।

विद्या समीक्षा केंद्र को एक समर्पित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और सक्रिय कॉल सेंटर का भी सहयोग प्राप्त है। इन व्यवस्थाओं से शिकायत निवारण, डेटा सत्यापन और फील्ड स्तर से फीडबैक की प्रक्रिया मजबूत हुई है, जिससे शासन और आम नागरिकों के बीच भरोसा और सहभागिता बढ़ी है।

आईबीआईटीएफ ने यह भी कहा है कि विद्या समीक्षा केंद्र डेटा-आधारित शासन संस्कृति को स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। इसके चलते शिक्षा प्रशासन अधिक प्रो-एक्टिव, पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित स्वरूप में आगे बढ़ा है। भारत सरकार के एनएम-आईसीपीएस मिशन के अंतर्गत स्थापित प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र के रूप में आईबीआईटीएफ ने इसे डेटा-आधारित शिक्षा सुधार और तकनीक-सक्षम सुशासन का राष्ट्रीय मानक बताया है। इससे छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी डिजिटल और नागरिक-केंद्रित शासन मॉडल वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
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