Chhattisgarh loksabha election result 2024; Durg loksabha Election Result 2024: छत्तीसगढ़ की वीआईपी सीटों में से एक दुर्ग लोकसभा सीट पर विजय बघेल जीत गये हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र साहू को हराया। उन्होंने 4 लाख 38 हजार 226 वोटों से जीत हासिल की है। विजय बघेल को 9 लाख 56 हजार 497 वोट मिले हैं। वहीं राजेंद्र साहू को 5 लाख 18 हजार 271 वोट मिले हैं। इस तरह जीत का अंतर 4 लाख 38 हजार 226 रहा। कुल वोट का प्रतिशत 62 रहा। विजय बघेल राज्य के पूर्व सीएम भूपेंद्र बघेल के भतीजे हैं। इस जिले में भिलाई स्टील प्लांट होने से यह क्षेत्र विशिष्ट स्थान रखता है। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में कुल 20 लाख 90 हजार 414 मतदाता हैं, जिनमें से 15,40,193 मतदाताओं ने ने वोटिंग की है।
इस सीट पर पहली बार वर्ष 1952 में कांग्रेस के वासुदेव एस किरोलीकर ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद साल 1957 में मोहनलाल बाकलीवाल, 1967 में विश्वनाथ तामस्कर, 1968 में चंदूलाल चंद्राकर, 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार मोहन जैन ने विजयश्री हासिल की थी। साल 1989 में जनता दल के उम्मीदवार पुरुषोत्तम कौशिक ने जीत हासिल की, लेकिन 1991 में फिर से चंदूलाल चंद्राकर ने जीत दर्ज की। 1995 में चंदूलाल चंद्राकर के निधन के बाद 1996 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ताराचंद साहू साहू साल 2004 तक जीतते रहे। उनके बागी होने पर साल 2009 में बीजेपी की सरोज पांडे ने विजय हासिल की। इसके बाद 2014 में कांग्रेस के ताम्रध्वज साहू ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2019 में मोदी लहर में बीजेपी के विजय बघेल ने जीत हासिल की।
दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में कुल 9 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें पाटन, दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर, भिलाई नगर, वैशाली नगर, अहिवारा , साजा, बेमेतरा और नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र शामिल है। इन 9 सीटों में से 2 विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जिसमें अहिवारा और नवागढ़ सीट शामिल है। पिछले विधानसभा चुनाव में 2 सीटों को छोड़कर शेष 7 सीटों में बीजेपी ने जीत हासिल की थी।पाटन से कांग्रेस के भूपेश बघेल और भिलाई से देवेंद्र यादव ने जीत हासिल की थी।
दुर्ग लोकसभा सामान्य सीट है, यहां अब तक 17 बार चुनाव हो चुके हैं। साल 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद 2004 से 2019 तक यहां 4 बार वोटिंग हो चुकी है। यहां 3 बार भाजपा तो सिर्फ एक बार 2014 में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी।
जातीय समीकरण
दुर्ग कुर्मी, यादव और साहू समाज की बाहुल्यता वाला इलाका माना जाता है। ऐसे में टिकट को लेकर राजनीतिक दल जातिगत समीकरण बैठाने लगाने में रहते हैं। यहां साहू 30-35 प्रतिशत, कुर्मी 20-22 प्रतिशत और यादव 12-15 प्रतिशत की संख्या में हैं।
विजय बघेल का राजनीतिक सफर
विजय बघेल पाटन विधानसभा क्षेत्र से चार बार चुनाव लड़ चुके हैं। विजय बघेल साल 2019 में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर सांसद बने थे। विजय बघेल ने अपनी राजनीति करियर की शुरुआत साल 2000 में की थी। 2000 में विजय बघेल भिलाई नगर परिषद का चुनाव स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जीता। उसके बाद साल 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े पर हार का सामना करना पड़ा। साल 2003 में चुनाव हारने के बाद विजय बघेल बीजेपी में शामिल हो गए। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पाटन विधानसभा सीट से उतारा। दूसरी ओर कांग्रेस की तरफ से भूपेश बघेल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में विजय बघेल ने भूपेश बघेल करारी शिकस्त देते हुए हरा दिया। विजय बघेल पहली बार अपने चाचा भूपेश बघेल को चुनाव हराकर विधानसभा पहुंचे थे। विजय बघेल बीजेपी सरकार में संसदीय सचिव भी रह चुके हैं। साल 2013 के चुनाव में बीजेपी ने विजय पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए पाटन विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। इस बार भूपेश बघेल ने उन्हें हराकर बदला ले लिया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में विजय बघेल को दुर्ग लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से विजय बघेल ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर को तीन लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से मात दी थी।
राजेंद्र साहू का राजनीतिक सफर
कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र साहू पूर्व सीएम भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं। 46 साल के राजेंद्र साहू पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उनके पास 66 लाख 26 हजार की चल संपत्ति और 6 करोड़ 33 लाख की अचल संपत्ति है। राजेंद्र साहू राजनीति के चाणक्य वरिष्ठ नेता स्वर्गीय वासुदेव चंद्राकर के शिष्य रह चुके हैं। पूर्व सांसद स्वर्गीय ताराचंद साहू ने जब बीजेपी छोड़कर छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच बनाई, तो राजेंद्र साहू ने उनकी पार्टी ज्वॉइन की थी। कांग्रेस की यूथ विंग और दुर्ग जिले में सक्रिय कार्यकर्ता रह चुके राजेंद्र साहू ने क्षेत्रीय पार्टी स्वाभिमान मंच से दुर्ग विधायक और 2009 में दुर्ग नगर निगम के महापौर का चुनाव लड़ा था।
जब भूपेश बघेल साल 2017 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने तो राजेंद्र साहू की फिर कांग्रेस में वापसी हुई। 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए वे टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन इसके पहले सहकारी बैंक में तिरपाल घोटाला उजागर होने के बाद तत्कालीन सहकारी बैंक अध्यक्ष को हटाकर राजेंद्र साहू को ये जिम्मेदारी दे दी गई। 14 साल पहले साल 2009 में छत्तीसगढ़िया बेरोजगारों की भर्ती की मांग को लेकर प्रदर्शन के वक्त उनके समेत 10 लोगों के खिलाफ सुपेला थाने में एफआईआर दर्ज हुआ था।