स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात और मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने चार दिन से जारी हड़ताल वापस ले ली। 1 अक्टूबर से पीजी डॉक्टरों और एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी लागू होगी। डॉक्टरों ने पीजी बॉन्ड राशि और अनिवार्य सेवा अवधि घटाने की भी मांग रखी है।
राज्य में पिछले चार दिन से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार दोपहर को खत्म हो गई है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करके अपनी समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने एसोसिएशन की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के डॉक्टरों का बढ़ा हुआ स्टाइपेंड 1 अक्तूबर से लागू हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री से मिले आश्वासन के बाद जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया।
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बॉन्ड राशि और सेवा अवधि घटाने की मांग
स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को सामने रखा। मुलाकात के दौरान डॉक्टरों ने पीजी बॉन्ड की राशि 50 लाख रुपये से घटाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की। इसके साथ ही एसोसिएशन ने अनिवार्य सेवा की अवधि को भी दो साल से घटाकर एक साल करने का आग्रह किया। स्वास्थ्य मंत्री ने इन मांगों पर सकारात्मक कदम उठाने की बात कही।
अक्तूबर महीने से लागू होंगी नई स्टाइपेंड दरें
बैठक में, सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने का निर्णय भी हुआ। 1 अक्तूबर से लागू होने वाली नई दरों के तहत पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टरों का स्टाइपेंड 67,500 रुपये से बढ़ाकर 85,050 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। द्वितीय वर्ष के डॉक्टरों का स्टाइपेंड 71,450 रुपये से बढ़ाकर 90,027 रुपये प्रतिमाह होगा।
वहीं, तृतीय वर्ष के डॉक्टरों को 74,600 रुपये के स्थान पर 93,996 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड प्राप्त होगा। स्टाइपेंड वृद्धि में एमबीबीएस इंटर्न को भी शामिल किया गया है। एक अक्तूबर से उन्हें भी प्रतिमाह 25 हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा।